देश की खबरें | दिल्ली पुलिस फिल्म के जरिये 'पूर्वोत्तर के लोगों को गले लगाओ' का संदेश दे रही

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली पुलिस ने एक नई पहल शुरू की है जिसका आदर्श वाक्य है, आइए पूर्वोत्तर के लोगों के प्रति भेदभाव को ''पूरी तरह रोकें''। इसके तहत दिल्ली पुलिस ने एक लघु फिल्म तैयार की है जो पूर्वोत्तर वासियों को गले लगाने और उनकी असुरक्षा की भावना को समाप्त करने की बात करती है।

नयी दिल्ली, 29 जुलाई दिल्ली पुलिस ने एक नई पहल शुरू की है जिसका आदर्श वाक्य है, आइए पूर्वोत्तर के लोगों के प्रति भेदभाव को ''पूरी तरह रोकें''। इसके तहत दिल्ली पुलिस ने एक लघु फिल्म तैयार की है जो पूर्वोत्तर वासियों को गले लगाने और उनकी असुरक्षा की भावना को समाप्त करने की बात करती है।

15 मिनट की यह फिल्म बृहस्पतिवार को दूरदर्शन (डीडी) असम पर प्रसारित की गई और जल्द ही दिल्ली पुलिस और उसके अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के यूट्यूब चैनल पर रिलीज़ की जाएगी।

दिल्ली में रहने वाली त्रिपुरा की पत्रकार मधुमिता चक्रवर्ती द्वारा लिखी गई इस फिल्म में ओलंपियन मैरी कॉम, मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन जैसी पूर्वोत्तर की कई जानी-मानी हस्तियां हैं। फिल्म में पूर्वी राज्य के लोगों के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा की गयी विभिन्न पहलों का भी उल्लेख किया गया है।

फिल्म की पटकथा के मुताबिक, ''जब पूर्वोत्तर क्षेत्र के भारतीय नागरिक ओलंपिक और अन्य प्रतिष्ठित टूर्नामेंटों में पदक जीतते हैं तो देश तालियां बजाता है। हम हर दिन उनकी सेवाओं का आनंद लेते हैं। फिर भी हम में से कई लोग हमारे बारे में फैलाई गई गलत सूचना आपत्तिजनक नाम...चिंकी, मोमो, नेपाली, बहादुर, कोरोना...पर आपत्ति जताने के लिए खड़े नहीं होते हैं।''

फिल्म में दिखाया गया है कि, ''शिक्षा और रोजगार के उद्देश्य से देश भर के महानगरों और कस्बों में रहने वाले पूर्वोत्तर राज्यों, लद्दाख और दार्जिलिंग के कई भारतीय नागरिकों को इस तरह की अपमानजनक टिप्पणियों के साथ संबोधित किया जाता है। यह नस्लीय भेदभाव है जो राष्ट्रीय एकीकरण की प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।''

चक्रवर्ती का कहना है कि मंगोलिया के लोगों जैसे चेहरे-मोहरे वालों को अधिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने ''पीटीआई-'' से कहा, ''मैं भी पूर्वोत्तर से आती हूं लेकिन मेरा चेहरा मंगोलिया के लोगों जैसा नहीं है, जबकि ऐसी विशेषताओं वाले लोगों को बहुत अधिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है।''

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