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दिल्ली पुलिस पर महिला प्रदर्शनकारी से यौन दुर्व्यवहार का आरोप

भारत में कुछ यौन अपराधी, बलात्कार पीड़िता के जनानांगों में बोतल घुसा चुके हैं.

दिल्ली पुलिस पर महिला प्रदर्शनकारी से यौन दुर्व्यवहार का आरोप
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

भारत में कुछ यौन अपराधी, बलात्कार पीड़िता के जनानांगों में बोतल घुसा चुके हैं. अब दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी पर कुछ कुछ इससे मिलते जुलते आरोप लग रहे हैं.सोशल मीडिया पर कम से कम ऐसे दो वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें दिल्ली पुलिस के दो अधिकारी महिलाओं से बदसलूकी और यौन दुर्व्यवहार करते दिख रहे हैं. एक वीडियो में दिल्ली पुलिस का एक अधिकारी एक लड़की को थप्पड़ मारता हुआ दिख रहा है. कुछ प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि थप्पड़ मारने वाला एक आईपीएस अधिकारी है.

दूसरे वीडियो में दिल्ली पुलिस का एक तीन सितारा अधिकारी, एक लड़की के गुदा द्वार में जानबूझकर लाठी घुसाता दिख रहा है. वीडियो में आरोपी पुलिस अधिकारी का चेहरा साफ दिख रहा है. और यह भी दिख रहा है कि वह अपनी लाठी टेढ़ी कर पास से गुजर रही एक लड़की पर यौन हमला कर रहा है. भारत में आम तौर पर तीन सितारा पुलिस अधिकारी, इंस्पेक्टर रैंक का होता है.

सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे कुछ और वीडियोज में भी बिना वर्दी के कुछ लोग प्रदर्शनकारियों को पीटते दिख रहे हैं.

सोमवार, 20 जुलाई को छात्रों को संसद जाने से रोकने के दौरान दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पैलेट गनों का भी इस्तेमाल किया.

कोलंबिया यूनिवर्सिटी में दक्षिण एशिया की राजनीति की प्रोफेसर डॉ. रूमेला सेन ने डीडब्ल्यू से बातचीत में कहा, "राजनीतिक संघर्षों के इतिहास को अगर देखें तो इस तरह का बल प्रयोग आम तौर पर आंदोलनों को और मजबूत बनाता है." दिल्ली के प्रदर्शन में पुलिस के बल प्रयोग पर उन्होंने कहा कि ऐसे कदमों से एक नैतिक आक्रोश भी पैदा होता है.

क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता और क्या कर रही हैं अदालतें

भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में बलात्कार, घूरना और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने पर कड़ी सजा का प्रावधान है. बीएनएस की धारा 74 के मुताबिक, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने की मंशा से अगर उस पर कोई भी हमला होता है तो इस मामले में कम से कम एक से पांच साल की सजा का प्रावधान है.

देश में संविधान और आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए जिम्मेदार भारत की सर्वोच्च अदालत का कहना है कि, प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को लेकर "हमारा समय बर्बाद मत कीजिए."

सुप्रीम कोर्ट के इस इनकार से ठीक एक दिन पहले, मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने भी पुलिस के बल प्रयोग के मामले में कहा कि "कोर्ट को इन सब मामलों में मत घसीटिए."

क्या भारत में पुलिस सत्ता की कठपुतली है?

सोमवार को दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई से तीन दिन पहले ही, केंद्र सरकार ने दिल्ली के पुलिस आयुक्त को बदल दिया. गृह मंत्रालय ने 17 जुलाई की सुबह एक आदेश जारी कर इंटेलिजेंस ब्यूरो में डायरेक्टर पद पर तैनात अनुराग कुमार को दिल्ली का 27वां कमिश्नर नियुक्त कर दिया. इस तरह केंद्र सरकार ने सतीश गोलछा को दिल्ली पुलिस कमिश्नर के पद से 11 महीने से भी कम समय में हटा दिया.

सामाजिक कार्यकर्ता, कुछ कानूनविद व पूर्व पुलिस अधिकारी कहते हैं कि पुलिस, राजनेताओं की कठपुतली ना बने, इसके लिए पुलिस सुधार जरूरी हैं. पुलिस सुधारों की अपील के तहत, पुलिस को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने की मांग भी होती रही है. 1977 से लेकर 2005 तक पुलिस सुधारों को लेकर देश में पांच आयोग बनाए गए, लेकिन इन आयोगों की अहम सिफारिशों को कभी अमल में नहीं लाया गया.

पूर्व आईपीएस अधिकारी और डीजीपी विभूति नारायण सिंह कहते हैं कि पिछले 12 साल में भारत में पुलिस और हिंसक हुई है. वह कहते हैं कि बीजेपी सरकार के कार्यकाल में न्याय संहिता समेत कुछ अहम सुधार जरूर हुए हैं, लेकिन पुलिस के व्यवहार में बदलाव को लेकर कोई कदम नहीं उठाए गए.

भारत की पुलिस अभी भी मुख्यत: 1861 के पुलिस एक्ट से चलती है. हालांकि बाद में इसमें समय समय पर कई सुधार हुए, लेकिन मूलभूत प्रेरणा अब भी अंग्रेजी हूकूमत के एक्ट पर ही आधारित हैं. पुलिस सेवा में आने के बाद भारत के आईपीएस अधिकारी शपथ लेते हुए कहते हैं कि वे "सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा" करेंगे. वे बिना डर, पक्षपात, मोह या दुर्भावना से अपनी ड्यूटी निभाएंगे.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 23, 2026 12:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).