देश की खबरें | दिल्ली उच्च न्यायालय ने यूएपीए के तहत दोषी ठहराए गए व्यक्ति की याचिका खारिज की
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक दोषी की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें भारत में आईएसआईएस के आधार को स्थापित करने की साजिश रचने के लिए गैर कानून गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत मिली सजा और दूसरे मामले में मिले दंड को ‘साथ-साथ’ चलाने का निर्देश देने का आग्रह किया गया था।
नयी दिल्ली, आठ जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक दोषी की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें भारत में आईएसआईएस के आधार को स्थापित करने की साजिश रचने के लिए गैर कानून गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत मिली सजा और दूसरे मामले में मिले दंड को ‘साथ-साथ’ चलाने का निर्देश देने का आग्रह किया गया था।
याचिकाकर्ता ने कहा कि वह एक युवा, गरीब और अशिक्षित व्यक्ति है, जिसने स्वयं को सुधारने, शिक्षा प्राप्त करने और समाज का एक उपयोगी सदस्य बनने की इच्छा से दोनों निचली अदालतों के समक्ष स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार किया था।
याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति स्वर्णकांत शर्मा ने कहा कि दोनों सजाओं को एक साथ चलाने के लिए विवेकाधिकार का प्रयोग करने का कोई कारण नहीं है।
न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाकर्ता मोहसिन इब्राहिम सैय्यद द्वारा किया गया अपराध गंभीर था और इसका राष्ट्रीय सुरक्षा और सांप्रदायिक सद्भाव पर प्रभाव पड़ा।
अदालत ने सात जून को पारित फैसले में कहा, “आतंकवाद न केवल देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि निर्दोष नागरिकों और संस्थाओं को अंधाधुंध तरीके से निशाना बनाकर समाज के ताने-बाने को भी खतरे में डालता है, जिसका उद्देश्य देश के आम और निर्दोष नागरिकों में भय पैदा करना है।”
फैसले में कहा गया है, “ इनके परिणामस्वरूप निर्दोष लोगों की जान जाती है, संपत्ति नष्ट होती है और क्षेत्रों में अस्थिरता आती है। ये प्रभाव अक्सर लंबे समय तक बने रहते हैं।”
न्यायाधीश ने कहा कि ये राष्ट्र में शांति, सहिष्णुता और सह-अस्तित्व के मौलिक मूल्यों के लिए चुनौती हैं।
न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ता को दो अलग-अलग मामलों में सुनवाई पूरी होने के बाद दोषी ठहराया गया है तथा एक मामले में आठ साल और दूसरे मामले में सात साल की सजा अलग अलग चलने से कोई अन्याय नहीं होगा।
उन्होंने कहा, "एक मामले में याचिकाकर्ता को अर्धकुंभ मेले के दौरान हरिद्वार शहर में हमला करने की साजिश रचने और उसके लिए धन जुटाने के लिए दोषी ठहराया गया है। वहीं, दूसरे मामले में याचिकाकर्ता को आईएसआईएस की गतिविधियों को बढ़ावा देने, युवाओं को फिदायीन बनने के लिए लुभाने के उद्देश्य से भर्ती करने और हिंदू महासभा के एक नेता की हत्या की साजिश रचने के लिए दोषी ठहराया गया है।"
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