देश की खबरें | दिल्ली उच्च न्यायालय ने बिजली मिस्त्री को 20 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने बिजली के खंभे से गिरकर शत प्रतिशत दिव्यांग हुए बिजली मिस्त्री (इलेक्ट्रिशियन) को 20 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश बुधवार को दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि इस राशि से उसके लाभ के लिए किराना दुकान खोली जानी चाहिए।
नयी दिल्ली, 25 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने बिजली के खंभे से गिरकर शत प्रतिशत दिव्यांग हुए बिजली मिस्त्री (इलेक्ट्रिशियन) को 20 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश बुधवार को दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि इस राशि से उसके लाभ के लिए किराना दुकान खोली जानी चाहिए।
अदालत ने कहा कि मुआवजे की राशि का 50-50 प्रतिशत हिस्सा दिल्ली के कई इलाकों में बिजली वितरण करने वाली कंपनी बीएसईएस राजधानी पॉवर लिमिटेड (बीआरपीएल) और बीआरपीएल के लिए मरम्मत और देखरेख का काम करने वाली एम/एस ब्रायन कंस्ट्रक्शन कंपनी (ब्रायन) देंगे।
न्यायमूर्ति अनूप जयराम भामभाई ने कहा कि 28 वर्षीय बिजली मिस्त्री भरत जिंदा है और वह मुश्किल से जीवित बचा। अदालत ने उत्तर प्रदेश को निर्देश दिया कि वह भरत को दिव्यांग पेंशन, निशुल्क फिजियोथेरेपी आदि मुहैया कराना जारी रखे जिसकी समय-समय पर उसे जरूरत पड़ेगी। भरत इस समय उत्तर प्रदेश में रह रहा है।
न्यायमूर्ति ने 20 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश देते हुए कहा कि अदालत द्वारा 2016 में दिए निर्देश के तहत पीड़ित पूरी राशि को अपने खाते में रखने और सावधि जमा करने को अधिकृत है।
गौरतलब है कि वर्ष 2014 में नयी दिल्ली के बिजवासन में बिजली में खराबी आने पर ब्रायन के निर्देश पर 21 वर्षीय भरत बिजली की मरम्मत कर रहा था लेकिन करंट लगने से वह खंभे से गिर गया।
अदालत ने कहा कि हादसे के वक्त पीड़ित, ब्रायन द्वारा दिए गए काम को कर रहा था और ‘‘सख्त जवाबदेही के सिद्धांत’ के तहत ब्रायन और बीआरपीएल की संयुक्त रूप से उसे इस अवस्था में पहुंचाने के लिए मुआवजा देने की जिम्मेदारी है।
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