देश की खबरें | दिल्ली उच्च न्यायालय ने आश्रय गृहों की सुरक्षा, सामाजिक अंकेक्षण का आदेश दिया

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नयी दिल्ली, 11 नवंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने शहर के मुख्य सचिव को दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) के सभी आश्रय गृहों की सुरक्षा और सामाजिक अंकेक्षण करने का निर्देश दिया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनमें केवल पात्र लोग ही रह सकें।

तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने छह नवंबर को सुनाए गए एक आदेश में इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है।

न्यायमूर्ति शर्मा को इसके बाद से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया है।

अदालत ने रेखांकित किया कि बड़ी संख्या में डीयूएसआईबी के आश्रय गृह सुरक्षा संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, क्योंकि उनमें कई ऐसे लोगों का कब्जा है, जो वहां रहने के लिए पात्र नहीं हैं। अदालत ने कहा कि इसलिए इन आश्रय गृहों के बारे में आंकड़े एकत्र करना आवश्यक है।

पीठ ने कहा , ‘‘ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को सभी डीयूएसआईबी आश्रय गृहों का सुरक्षा संबंधी और सामाजिक अंकेक्षण करने का निर्देश दिया जाता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि डीयूएसआईबी द्वारा स्थापित आश्रय गृहों में केवल वही लोग रह सकें, जो वहां रहने की पात्रता को पूरा करते हैं। ’’

पीठ में न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला भी थे।

उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में सभी रैन बसेरों में भोजन उपलब्ध कराने वाले अक्षय पात्र फाउंडेशन को बकाया भुगतान न करने के मुद्दे का स्वत: संज्ञान लेते हुए यह आदेश सुनाया।

दिल्ली सरकार के प्रधान सचिव (वित्त) ने कहा कि अक्षय पात्र फाउंडेशन को मार्च 2024 तक भुगतान करने के लिए जरूरी मंजूरी दे दी गई है और सभी बकाया राशि का जल्द ही भुगतान कर दिया जाएगा।

दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि डीयूएसआईबी के आश्रय गृहों में भोजन आपूर्ति की प्रक्रिया और ऐसी आपूर्ति के लिए भुगतान तंत्र को सुव्यवस्थित करने के लिए छह सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाएगा।

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