देश की खबरें | ट्रांसमैन को आश्रय गृह से जबरन ले जाने पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने जताई नाराजगी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा एक 22 वर्षीय ट्रांसजेंडर पुरुष को एक आश्रय गृह से कथित तौर पर जबरन ले जाने पर बुधवार को गहरी नाराजगी जताई और कहा कि एक वयस्क को उसकी इच्छा के विरुद्ध नहीं ले जाया जा सकता।

नयी दिल्ली, तीन अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा एक 22 वर्षीय ट्रांसजेंडर पुरुष को एक आश्रय गृह से कथित तौर पर जबरन ले जाने पर बुधवार को गहरी नाराजगी जताई और कहा कि एक वयस्क को उसकी इच्छा के विरुद्ध नहीं ले जाया जा सकता।

इस ट्रांसजेंडर पुरुष के लापता होने को लेकर उसके माता-पिता द्वारा दर्ज शिकायत के आधार पर उत्तर प्रदेश पुलिस उसे कथित तौर पर जबरन लेकर गयी है।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली पुलिस की भी खिंचाई करते हुए कहा कि एक व्यक्ति को 22 जुलाई की रात को उसके अधिकार क्षेत्र से उठाकर ले जाया गया, जबकि ऐसा बताया गया है कि उसने (दिल्ली पुलिस ने) खुद उत्तर प्रदेश पुलिस की इस मामले में ‘सहायता’ की थी। अदालत ने दिल्ली पुलिस को इस बारे में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा, ‘‘ऐसे कई फैसले हैं, जिनमें कहा गया है कि एक वयस्क को जबरन नहीं ले जाया जा सकता है, लेकिन कोई भी उन्हें (फैसलों को) पढ़ नहीं रहा है। यहां तक कि माता-पिता भी जबरन नहीं ले जा सकते। वे अपने वयस्क बच्चे को उसकी इच्छा के विरुद्ध नहीं ले जा सकते। हम साधारण कारण से इसकी अनुमति नहीं दे सकते।”

अदालत आश्रय गृह चलाने वाले ‘मित्र ट्रस्ट’ नामक संगठन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने कहा कि उन पुलिस अधिकारियों को जवाबदेह होना चाहिए। उन्होंने अदालत से घटना में शामिल अधिकारियों की भूमिका की जांच करने का आग्रह किया।

उन्होंने केंद्र सरकार को ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए एक प्रोटोकॉल तैयार करने का निर्देश देने की भी प्रार्थना की।

दिल्ली पुलिस के वकील ने कहा कि ‘ट्रांसमैन’ स्वेच्छा से उत्तर प्रदेश पुलिस और अपने परिवार के साथ गया है और संबंधित स्थानीय पुलिस ने इस संबंध में एक बयान दर्ज किया है।

अदालत ने ट्रांसमैन के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए मुआवजे की मांग करने वाली याचिका पर दिल्ली पुलिस, उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ-साथ केंद्र सरकार को नोटिस जारी किये और जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। इसके लिए प्रतिवादियों को चार सप्ताह का समय दिया गया है।

अदालत ने याचिका पर केंद्र सरकार से अपना रुख स्पष्ट करने की मांग करते हुए कहा कि यह एक ‘महत्वपूर्ण मुद्दा’ है।

वकील सौरभ चौहान के माध्यम से दायर याचिका में आश्रय गृहों के निवासियों के अधिकारों और सुरक्षा के लिए प्रोटोकॉल तैयार करने के निर्देश देने की मांग की गई है।

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