सीमा सील होने से वकील नहीं पहुंच सका दिल्ली उच्च न्यायालय
अधिवक्ता ने उच्च न्यायालय के अधिकारियों को फोन करके सूचित किया कि उसे सीमा पार करने की इजाजत नहीं दी गई। साथ ही उनके घर पर वाईफाई की सुविधा नहीं है, जिससे वह वहां से वीडियो कॉन्फ्रेंस की जरिए सुनवाई में शामिल हो सकें।
नयी दिल्ली , पांच मई कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन की पाबंदियों और दिल्ली-हरियाणा सीमा के सील होने से एक अधिवक्ता अपने मुवक्किल की जमानत याचिका पर बहस के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय नहीं पहुंच सका। वहां वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मामले पर बहस होनी थी।
अधिवक्ता ने उच्च न्यायालय के अधिकारियों को फोन करके सूचित किया कि उसे सीमा पार करने की इजाजत नहीं दी गई। साथ ही उनके घर पर वाईफाई की सुविधा नहीं है, जिससे वह वहां से वीडियो कॉन्फ्रेंस की जरिए सुनवाई में शामिल हो सकें।
वकील को एक आरोपी की ओर से पेश होना था, जिसने इस आधार पर एक माह की जमानत दिए जाने का अनुरोध किया है कि उसकी मां की तबियत खराब है और उनका मोतियाबिंद का ऑपरेशन होना है। ऑपरेशन की तारीख फिलहाल तय नहीं है।
न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता ने सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध स्वीकार करते हुए मामले को आठ मई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
उच्च न्यायालय ने अपनी इमारत में दो अदालत कक्ष उन वकीलों अथवा वादियों को वीडियो कॉन्फ्रेंस के लिए मुहैया कराए हैं जिनके मामलों को सूचीबद्ध करने की मंजूरी मिल चुकी है।
यह सुविधा उन वकीलों के लिए हैं जो अपने घरों अथवा कार्यालयों से वीडियो कॉन्फ्रेंस नहीं कर सकते हैं।
गौरतलब है कि दिल्ली की हरियाणा और उत्तर प्रदेश से लगती सीमा पिछले सप्ताह से सील चल रही है और केवल आवश्यक सेवा में लगे लोगों को पास के आधार पर ही आने-जाने की इजाजत है।
दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि वह एनसीआर में रहने वाले वकीलों को दिल्ली सीमा पार करने देने के निर्देश पुलिस को दें ।
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