जरुरी जानकारी | दिल्ली उच्च न्यायालय ने अनिल अंबानी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया पर लगायी रोक

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नयी दिल्ली, 27 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के तत्कालीन (रिपीट तत्कालीन) चेयरमैन अनिल अंबानी के खिलाफ दिवालिया समाधान प्रक्रिया (आईआरपी) पर बृहस्पतिवार को रोक लगा दी।

यह दिवालिया प्रक्रिया भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) द्वारा अनिल अंबानी की दो कंपनियों को दिये गये 1,200 करोड़ रुपये के कर्ज की वसूली के संबंध में शुरू की गयी थी।

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अंबानी ने एसबीआई द्वारा आरकॉम और रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड (आरआईटीएल) को दिये गये क्रमश: 565 करोड़ रुपये और 635 करोड़ रुपये के ऋण के लिये अगस्त 2016 में व्यक्तिगत गारंटी दी थी।

न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने दिवालिया एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत आईआरपी पर रोक लगाने के साथ ही अगली सुनवाई तक अंबानी पर अपनी संपत्तियों या कानूनी अधिकारों और हितों के स्थानांतरण, किसी को देने, ऋण लेने या बेचने पर रोक लगा दी।

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अदालत ने इस संबंध में केंद्र सरकार, भारतीय दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) तथा एसबीआई को नोटिस जारी किया और कहा कि छह अक्टूबर से पहले इस पर अपना रुख स्पष्ट करें। इस मामले की अगली सुनवाई छह अक्टूबर को होनी है।

अदालत ने यह भी कहा कि कॉरपोरेट देनदार (कंपनियों) के संबंध में कार्रवाई जारी रहेगी, और इस दौरान आईआरपी द्वारा निजी गारंटी देने वाले (अंबानी) की देनदारियों की जांच भी की जा सकती है।

अदालत ने कहा, ‘‘हालांकि, आईबीसी के भाग तीन के तहत याचिकाकर्ता (अंबानी) के खिलाफ कार्रवाई स्थगित रहेगी।’’

अंबानी ने अपनी याचिका में आईबीबीआई के नियमन (कर्जदार कंपनी को व्यक्तिगत गारंटी देने संबंधी दिवाला समाधान प्रक्रिया) 2019 की संवैधानिकता को चुनौती थी।

राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने 20 अगस्त को दिये अपने आदेश में अंबानी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के लिए कहा था।

एनसीएलटी ने कहा था कि रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस इंफ्राटेल दोनों कर्ज की किस्तें चुकानें में असफल रहीं। एनसीएलटी ने एक समाधान पेशेवर की नियुक्ति का आदेश दिया था और एसबीआई को आवश्यक कार्रवाई करने के लिये कहा था।

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