देश की खबरें | दिल्ली उच्च न्यायालय ने 12 वकीलों को अवमानना के आरोप से मुक्त किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2006 में वकीलों के एक विरोध प्रदर्शन के दौरान तीस हजारी अदालत में तोड़फोड़ की घटना में शामिल होने के आरोपी 12 अधिवक्ताओं के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुक्रवार को बंद कर दी।

नयी दिल्ली, 28 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2006 में वकीलों के एक विरोध प्रदर्शन के दौरान तीस हजारी अदालत में तोड़फोड़ की घटना में शामिल होने के आरोपी 12 अधिवक्ताओं के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुक्रवार को बंद कर दी।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि अदालत कक्षों को कथित तौर पर हुई क्षति को विरोध प्रदर्शन से जोड़ने वाला कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।

अदालत ने कहा कि पिछले 17 वर्षों की कार्यवाही के दौरान, उन सभी ने गहरा खेद और न्यायपालिका की संस्था के प्रति अत्यंत सम्मान व्यक्त किया है और कहा है कि उनका इरादा कभी भी अदालत की महिमा और गरिमा को कम करना नहीं था।

पीठ ने कहा, “हम वर्तमान आपराधिक अवमानना कार्यवाही में शेष कथित अवमाननाकर्ताओं/प्रतिवादियों को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को रद्द करते हैं” और इस प्रकार वे आरोप मुक्त होते हैं।

वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा इस मामले में न्याय मित्र के रूप में पेश हुए।

रोहिणी अदालत परिसर की स्थापना के खिलाफ तीस हजारी अदालत के वकील हड़ताल पर थे उसी दौरान 24 फरवरी, 2006 को यह घटना हुई और इसे लेकर आपराधिक अवामनना की कार्यवाही शुरू की गई।

अवमानना कार्यवाही के नोटिस शुरुआत में 25 लोगों को जारी किए गए थे। इसके बाद, 13 को या तो आरोप मुक्त कर दिया गया या आपराधिक अवमानना कार्यवाही से उनका नाम हटा दिया गया।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\