देश की खबरें | दिल्ली आबकारी घोटाला: अदालत ने विजय नायर को 'वैधानिक जमानत' देने से इनकार किया
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नयी दिल्ली, 27 जुलाई राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने दिल्ली की आबकारी नीति में कथित घोटाले से संबंधित धनशोधन के मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व संचार प्रभारी विजय नायर की ‘वैधानिक (डिफ़ॉल्ट) जमानत' अर्जी बृहस्पतिवार को खारिज कर दी।
विशेष न्यायाधीश एम.के. नागपाल ने आरोपी को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर दिल्ली उच्च न्यायालय पहले ही विचार कर चुका है, जिसने नायर की नियमित ज़मानत की याचिका खारिज कर दी थी। नायर ने इस आधार पर नियमित जमानत देने के लिए याचिका दाखिल की थी कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ‘‘अधूरी अभियोजन शिकायत” (ईडी के आरोप पत्र के बराबर) दायर की थी।
न्यायाधीश ने कहा कि इसके मद्देनजर यह अदालत आरोपी की वैधानिक जमानत के आधार पर विचार करने के लिए सक्षम या उपयुक्त मंच नहीं है और आरोपी इन आधार को लेकर उच्च न्यायालय के उसी न्यायाधीश या पीठ का रुख करें और उनसे अनुरोध करें।
उन्होंने कहा कि इसी के साथ आरोपी विजय नायर की ओर से दायर याचिका को खारिज किया जाता है, क्योंकि यह इस अदालत में सुनवाई योग्य नहीं है।
नायर ने इस आधार पर वैधानिक जमानत मांगी थी कि उसके खिलाफ 60 दिन की निर्धारित अवधि में भले ही पूरक अभियोजन शिकायत दायर की गई हो लेकिन इसे उनके संबंध में वास्तविक जांच पूरी हुए बिना ही दायर कर दिया गया था।
याचिका में कहा गया था कि इसे अधूरा आरोप पत्र या शिकायत कहा जाएगा जो एजेंसी ने याची के वैधानिक ज़मानत लेने के अधिकार को बाधित करने के लिए दायर की थी।
ईडी ने आवेदन का विरोध करते हुए कहा था कि नायर के संबंध में जांच तब पूरी हो गई थी जब अभियोजन शिकायत या उसके खिलाफ पहली पूरक शिकायत दायर की गयी थी।
दिल्ली सरकार ने 17 नवंबर, 2021 को आबकारी नीति लागू की थी, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच अगस्त 2022 के अंत में इसे रद्द कर दिया था। इसे लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और ईडी ने मामले दर्ज किए हैं।
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