अगरतला, नौ फरवरी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की त्रिपुरा इकाई के सचिव जितेंद्र चौधरी ने रविवार को कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे राजनीतिक दलों के लिए मंथन का विषय होंगे।
चौधरी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि दिल्ली में अपने 12 साल के शासन में आम आदमी पार्टी (आप) ने लोगों को शासन की एक अलग शैली दी।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को दिल्ली में 27 साल बाद सत्ता में वापसी की। भाजपा ने शराब घोटाले से लेकर ‘शीशमहल’ बनाने जैसे आरोप लगाकर केजरीवाल और आप के कथित भ्रष्टाचार और कुशासन को दिल्ली के लिए ‘आप-दा’ से जोड़कर इस चुनाव में मुख्य मुद्दा बनाया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इन विषयों पर लगातार हमले किए।
इन आरोपों के जरिए भाजपा ने केजरीवाल की ‘कट्टर ईमानदार’ वाली छवि पर प्रहार किया और इसे जनता के बीच विमर्श का मुद्दा बनाया और साथ ही विकास के कथित ‘केजरीवाल मॉडल’ को ‘आप-दा’ बताकर इसके मुकाबले विकास का ‘मोदी मॉडल’ पेश किया।
चौधरी ने दावा किया, ‘‘आप सरकार ने पानी की आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवा जैसी बुनियादी सुविधाओं को पूरा करते हुए बिजली के बिल लगभग शून्य कर दिये। दिल्ली में सरकारी शिक्षा क्षेत्र में विकास एक प्रमुख चर्चा का विषय बन गया।’’
त्रिपुरा विधानसभा में विपक्ष के नेता चौधरी ने दावा किया कि आप सरकार को केंद्र सरकार के भारी दबाव में काम करना पड़ा। उन्होंने कहा, ‘‘ (तत्कालीन) मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कई (तत्कालीन) मंत्रियों को झूठे आरोपों में सलाखों के पीछे डाल दिया गया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली के उपराज्यपाल ने आप के नेतृत्व वाली सरकार को कमजोर करने की कोशिश की। तमाम बाधाओं के बावजूद केजरीवाल सरकार ने लोगों के सामने एक अलग शासन मॉडल पेश किया। यह भी दर्शाता है कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो सरकार लोगों को बुनियादी सेवाओं में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।’’
चौधरी ने यह भी कहा कि अगर भाजपा को चुनौती देने के लिए ‘इंडिया’ गठबंधन जैसा कोई भाजपा विरोधी संयुक्त मंच होता तो भाजपा को चुनाव में 14 सीट भी नहीं मिलतीं।
उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा विरोधी वोट बैंक में विभाजन आप की हार का एक कारण प्रतीत होता है। शुरुआती नतीजों से संकेत मिलता है कि अगर ‘इंडिया’ गठबंधन जैसी भाजपा विरोधी ताकतों के बीच कोई समझौता होता तो भाजपा 14 सीट भी नहीं जीत पाती। हमें दिल्ली चुनाव के नतीजों पर मंथन करना होगा।’’
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