देश की खबरें | मेडिकल कॉलेज से हटाये गये अस्थायी चिकित्सकों के समर्थन में आया दिल्ली के डॉक्टरों का संगठन
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश), 22 अक्टूबर जवाहर लाल नेहरु मेडिकल कॉलेज से हटाये गये दो अस्थायी चिकित्सा अधिकारियों की पुन:वापसी के लिये प्रयासरत रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन को दिल्ली के डॉक्टरों के एक संगठन का समर्थन मिल गया है।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति को लिखे एक पत्र प्रोग्रेसिव मेडिकोज एंड साइंटिफिक फोरम (पीएमएसएफ) के अध्यक्ष डॉक्टर हरजीत सिंह ने मांग की है कि चिकित्साधिकारियों को पुन:वापस लिया जायें।

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बृहस्पतिवार को भेजे गये पत्र में कहा गया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन दो डॉक्टरों को इस लिये हटा दिया गया क्योंकि उनका बयान हाथरस के कथित सामूहिक बलात्कार मामले में पुलिस के बयान से मेल नहीं खाता था।

एएमयू के प्रवक्ता शाफे किदवई ने कहा कि उन दोनों डॉक्टरों को पिछले नौ सितम्बर को एक महीने के लिये नौकरी पर रखा गया था। उसके बाद उन्हें स्थिति के बारे में पूरी तरह अवगत कराया गया था। अब उन्हें हटाया जाना एक सामान्य प्रक्रिया है।

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गौरतलब है कि हाथरस सामूहिक बलात्कार मामले में सीबीआई द्वारा पूछताछ के 24 घंटे के अंदर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के जवाहर लाल नेहरु मेडिकल कॉलेज में दो अस्थायी चिकित्साधिकारियों को हटाये जाने पर विवाद खड़ा हो गया है।

यह मामला गत मंगलवार को प्रकाश में आया था जब मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने बताया कि जवाहर लाल नेहरु मेडिकल कॉलेज में अस्थायी चिकित्साधिकारी के तौर पर काम कर रहे डॉक्टर मोहम्मद अजीमुद्दीन और डॉक्टर उबैद इम्तियाज की सेवाएं समाप्त की जा रही हैं।

हाथरस मामले की जांच कर रही सीबीआई की टीम ने सोमवार को जवाहर लाल नेहरु मेडिकल कॉलेज अस्पताल जाकर पूछताछ की थी। हाथरस मामले की पीड़िता शुरुआत में इसी अस्पताल में भर्ती करायी गयी थी। यहां से उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया था, जहां इलाज के दौरान 29 सितम्बर को उसकी मौत हो गयी थी।

रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने बुधवार को एएमयू के कुलपति को लिखे पत्र में उनसे दो डॉक्टरों की बर्खास्तगी का आदेश वापस लेने का आग्रह किया है। पत्र में कहा गया है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो एसोसिएशन 24 घंटे के अंदर अपनी बैठक बुलाकर भविष्य की रणनीति तय करेगा।

बर्खास्त किये गये डॉक्टर अजीमुद्दीन और डॉक्टर इम्तियाज का कहना है कि उन्होंने हाथरस मामले में कोई भी बयान नहीं दिया है। सेवा समाप्ति से पहले उन्हें अपनी सफाई देने तक का मौका नहीं दिया गया। दोनों ने कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।

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