देश की खबरें | दिल्ली की अदालत ने वरिष्ठ अधिकारी की मंजूरी के बावजूद आरोपपत्र दाखिल नहीं करने पर लिय संज्ञान

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नयी दिल्ली, 18 फरवरी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की मंजूरी मिलने के बावजूद भी जांच अधिकारी (आईओ) के आरोपपत्र दाखिल नहीं करने पर कड़ा संज्ञान लेते हुए दिल्ली की एक अदालत ने पिछले तीन साल में इस तरह के आरोपपत्रों की स्थिति की जानकारी देने को कहा है।

अदालत ने कहा कि इससे निश्चित तौर पर दबा कर रखी गई फाइलें सामने आएंगी और कई जांच अधिकारी बेनकाब हो जाएंगे।

अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अरविंद बंसल ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारी की मंजूरी मिलने के बावजूद भी आरोपपत्र दाखिल नहीं करना पदसोपान व्यवस्था और सेवा के अनुशासन की अनदेखी करने के समान है।

अदालत ने कहा कि जांच समय पर पूरी हो जाने के बावजूद भी आरोपपत्र दाखिल नहीं करना आम आदमी का न्याय व्यवस्था में विश्वास को कम कर देता है।

अदालत ने कहा कि आईओ को वरिष्ठ अधिकारी द्वारा भेजे गये आरोपपत्र को अदालत में दाखिल करने के लिए एक समय सीमा निर्धारित होनी चाहिए और उसे इसका सख्ती से अनुपालन करने को कहा जाना चाहिए।

अदालत ने कहा कि यह समय सीमा संबद्ध सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) द्वारा आरोपपत्र भेजे जाने की तारीख से 30 दिनों से अधिक नहीं होनी चाहिए।

अदालत ने संबद्ध एसीपी को पिछले तीन साल (2018-20) में उनके द्वारा आईओ को भेजे गये आरोपपत्रों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया और संबद्ध आईओ से इसे दाखिल करने की स्थिति रिपोर्ट मंगाई है।

अदालत ने संबद्ध एसीपी को पुलिस उपायुक्त (दक्षिण-पूर्व) के मार्गदर्शन के तहत एक तंत्र भी बनाने का निर्देश दिया।

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