नयी दिल्ली, 23 अगस्त दिल्ली की एक अदालत ने अपनी पत्नी को तीन तलाक देने के आरोपी पति को यह कहते हुए अंतरिम जमानत दे दी कि प्राथमिकी दर्ज करने के दो माह बाद भी जांच अधिकारी (आईओ) ने ‘‘प्रासंगिक गवाहों के बयान लेने की भी जहमत नहीं उठाई।’’
अदालत ने ‘‘इस मामले की उचित जांच के लिए’’ आदेश की एक प्रति संबंधित पुलिस उपायुक्त को भी भेजी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने टिप्पणी की कि आरोपी ने कई लोगों और परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में तीन बार तलाक बोला लेकिन आईओ ने किसी गवाह के बयान नहीं दर्ज किए।
न्यायमूर्ति रावत ने कहा, ‘‘ इस मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में जहां मुस्लिम विमन एक्ट 2019 की धारा चार लगाने का अनुरोध किया गया है,जिसमें अधिकतम तीन वर्ष की सजा का प्रावधान है और जहां जांच अधिकारी ने प्राथमिकी दर्ज होने के दो माह बीत जाने पर भी शिकायतकर्ता द्वारा उल्लेखित प्रासंगिक गवाहों के बयान दर्ज करने की भी जहमत नहीं उठाई, वहां मैं इसे आरोपी को जमानत देने के लिए उचित मानता हूं।’’
अदालत ने यह भी कहा कि कानून के संबंधित प्रावधानों के अनुरूप आईओ ने आरोपी को जांच में शामिल होने का नोटिस पहले ही दे दिया है।
अदालत ने कहा कि आरोपी को 15,000 रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की जमानत देनी होगी।
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