ताजा खबरें | केंद्र के हस्तक्षेप के बिना दिल्ली चल नहीं सकती : मीनाक्षी लेखी

नयी दिल्ली, तीन अगस्त विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने बृहस्पतिवार को कहा कि संसद को दिल्ली के संबंध में कानून बनाने का पूर्ण अधिकार है और जब दिल्ली में सड़कों, अस्पतालों, स्कूलों और अन्य विकास कार्यों के लिए केंद्र धन देता है तो यहां व्यवस्था बिगड़ने पर उसे हस्तक्षेप करने का भी अधिकार है।

लेखी ने लोकसभा में दिल्ली में सेवाओं पर नियंत्रण से जुड़े अध्यादेश की जगह लेने वाले ‘राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली क्षेत्र सरकार संशोधन विधेयक 2023’ पर चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए यह बात कही।

लेखी ने इस दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘‘सादा वेशभूषा धारण करते करते एक आम आदमी कैसे शीश महल का निवासी बन गया। कई करोड़ रुपये का घोटाला करके राजधानी में ऐसी जगह पर बंगला बनवाया गया जहां एक ईंट भी रखने की अनुमति नहीं है।’’

उन्होंने पिछले दिनों दिल्ली में आई बाढ़ का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री बाढ़ नियंत्रण विभाग की बैठक में शामिल नहीं होते हैं और 6000 करोड़ रुपये से अधिक का बजट बाढ़ नियंत्रण के लिए होने के बाद भी दिल्ली को बचा नहीं पाते।

भारतीय जनता पार्टी की सांसद लेखी ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार पर दिल्ली में बाढ़ से बचाव को लेकर उपाए करने में विफल रहने का आरोप लगाया।

उन्होंने दिल्ली में प्रशासनिक नियंत्रण के मुद्दे पर दावा किया कि उच्चतम न्यायालय ने आधे अधिकार उप राज्यपाल के पास होने की बात मान ही ली है।

लेखी ने कहा कि शीर्ष अदालत ने अपने निर्णय में तय किया है दिल्ली केंद्रशासित प्रदेश है, पूर्ण राज्य नहीं।

उन्होंने कहा कि जब केंद्र कहता है कि जी-20 के लिए सड़कें ठीक की जाएं तो दिल्ली सरकार मना कर देती है, जब कोरोना महामारी के समय केंद्र सरकार ऑक्सीजन दिल्ली की सीमा पर लाकर खड़ी कर देती है तो दिल्ली सरकार की ओर से इतनी अव्यवस्था थी कि राजधानी के अस्पतालों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती।

लेखी ने कहा कि जब केंद्र सरकार दिल्ली के स्कूलों, कॉलेजों के लिए पैसे देती है और यहां काम नहीं होंगे तो उसे हस्तक्षेप करने का पूरा अधिकार है।

उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र के हस्तक्षेप के बिना दिल्ली चल ही नहीं सकती।’’

भाजपा की वरिष्ठ नेता ने दिल्ली सरकार पर 13,500 करोड़ रुपये केवल विज्ञापन पर खर्च करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब दिल्ली के मुख्यमंत्री सारी चीजों से पल्ला झाड़ लें और केंद्र को कोसना शुरू कर दें तो क्या केंद्र सरकार हस्तक्षेप नहीं करेगी?

उन्होंने इस विधेयक से संघीय ढांचे पर हमला करने के कुछ विपक्षी सदस्यों के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि संविधान के अनुसार भारत में संघीय ढांचा नहीं है, बल्कि अर्द्ध-संघीय ढांचा है जिसमें केंद्र को प्रमुखता है।

उन्होंने कहा कि संसद को दिल्ली के संबंध में कानून बनाने का पूर्ण अधिकार है।

उन्होंने कहा कि क्या इस संसद को पदों पर बैठे गैर जिम्मेदार लोगों को सही और गलत बताने की जिम्मेदारी नहीं है।

लेखी ने दिल्ली सरकार पर अधिकारियों पर दबाव बनाकर ‘गलत काम’ कराने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब नौकरशाही पर दबाव बनाया जाएगा तो क्या केंद्र कुछ नहीं करेगा।

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