देश की खबरें | दिल्ली पुस्तक मेला: पहले गणतंत्र दिवस समारोह, संविधान सभा की बैठकों की दुर्लभ तस्वीरों की प्रदर्शनी

नयी दिल्ली, पांच मार्च दिल्ली में इस साल आयोजित अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले का विषय ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ था और यहां भारत की आजादी की यात्रा को दर्शाते हुए एक विशेष पवेलियन तैयार किया गया था। इस पवेलियन में भारत के पहले गणतंत्र दिवस समारोह और संविधान सभा की बैठकों की दुर्लभ तस्वीरों का प्रदर्शन किया गया।

प्रदर्शनी में संसद संग्रहालय और अभिलेखागार से लिये गये चित्र और रिपोर्ट पहले गणतंत्र दिवस के इन उल्लासपूर्ण दृश्यों की एक झांकी पेश करती हैं। इस दुर्लभ प्रदर्शनी में ‘द हिन्दुस्तान टाइम्स’ अखबार की वह पुरानी खबर भी शामिल है जिसके साथ रोशनी से जगमग दिल्ली की इमारतों, पार्क और अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थलों को दिखाया गया है।

इस अखबार के 28 जनवरी, 1950 के अंक में एक साथ आठ तस्वीरें भी छपी थीं जिसका कैप्शन था-गणतंत्र दिवस पर दिल्ली की रात। इसके साथ ही विस्तृत खबर भी थी जिसका शीर्षक था- गणतंत्र दिवस पर ‘परीलोक’ जैसी दिखी राजधानी।

ब्रिटेन से आजाद होने के तीन साल बाद भारत के गणतांत्रिक देश बनने पर 26 जनवरी, 1950 की रात दिल्ली की मशहूर सार्वजनिक इमारतें, पार्क, रेलवे स्टेशन रोशनी से जगमग हो गये।

इस ऐतिहासिक दिवस पर राजेंद्र प्रसाद के देश के पहले राष्ट्रपति के रूप में पद की शपथ लेने के तुरंत बाद देश में चारों तरफ जश्न का माहौल था। पहला गणतंत्र दिवस समारोह यहां स्थित इरविन स्टेडियम (अब मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम) में आयोजित किया गया था।

प्रदर्शनी में एक ‘मोनोक्रोम फोटोग्राफ’ शामिल है जिसमें संविधान सभा के कुछ सदस्यों को इसके पहले सत्र में भाग लेने के लिए आते हुए दिखाया गया था। इसमें संविधान सभा के सचिव द्वारा इसके सदस्यों को भेजा गया निमंत्रण और उसमें लिखित ब्योरा शामिल है।

इसमें संविधान सभा के कुछ सदस्यों की दुर्लभ तस्वीरें दिखाई गई हैं जिनमें इसके अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू शामिल हैं, एक तस्वीर में नेहरू को भारतीय संविधान पर हस्ताक्षर करते हुए दिखाया गया है।

प्रदर्शनी में उस रिपोर्ट को भी प्रदर्शित किया गया है जिसे 27 नवंबर, 1949 को प्रकाशित किया गया था और जिसका शीर्षक था-भारतीय संविधान अंगीकृत-तीन साल से जारी कार्य का समापन।

प्रदर्शनी में भारतीय संविधान की शीशे में बंद अनुकृति और संविधान निर्माता बी आर आंबेडकर का एक मॉडल प्रदर्शित किया गया है।

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