ताजा खबरें | ‘डीपफेक’, सूरत के हीरा उद्योग और आलू किसानों की स्थिति पर राज्यसभा में जताई गई चिंता

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. राज्यसभा में शुक्रवार को विभिन्न दलों के सदस्यों ने ‘डीपफेक’ तकनीक से समाज को हो रहे नुकसान, सूरत के हीरा उद्योग की परेशानी, आलू किसानों की दयनीय स्थिति और हैदराबाद के मूसी नदी के अस्तिव पर छाए संकट को लेकर अपनी-अपनी चिंताएं व्यक्त कीं।

नयी दिल्ली, सात फरवरी राज्यसभा में शुक्रवार को विभिन्न दलों के सदस्यों ने ‘डीपफेक’ तकनीक से समाज को हो रहे नुकसान, सूरत के हीरा उद्योग की परेशानी, आलू किसानों की दयनीय स्थिति और हैदराबाद के मूसी नदी के अस्तिव पर छाए संकट को लेकर अपनी-अपनी चिंताएं व्यक्त कीं।

राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दर्शना सिंह ने कहा कि आज के युग में तकनीक ने जहां जीवन को आसान बनाने में सहयोग दिया है, वहीं दूसरी तरफ इसकी वजह से कभी-कभी कुछ गंभीर संकटों का भी सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस तकनीक का दुरुपयोग कर फर्जी जानकारी के जरिए समाज को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे कभी-कभी लोगों का जीवन संकट में पड़ जाता है।

सिंह ने कहा कि ‘डीपफेक’ भी एक ऐसी ही तकनीक है जो कृत्रिम मेधा और मशीन ‘लर्निंग’ का उपयोग कर किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज और हावभाव को बदल देती है।

उन्होंने कहा, ‘‘डीप फेक का दुरुपयोग एक गंभीर समस्या बन गई है। इस तकनीक के नकारात्मक इस्तेमाल से न केवल निजता और गोपनीयता खतरे में पड़ सकती है बल्कि समाज में भी कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।’’

उन्होंने कहा कि इसके इस्तेमाल से कभी-कभी वीडियो और ऑडियो को इतना सटीक बना दिया जाता है कि असली और नकली में अंतर कर पाना मुश्किल होता है।

उन्होंने कहा, ‘‘वैश्विक प्लेटफार्म पर तेजी से बढ़ती तकनीक के कारण डीपफेक के नकारात्मक प्रभाव को रोकना बहुत मुश्किल हो रहा है। मैं सरकार से अनुरोध करती हूं कि डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग को रोकने के लिए गंभीर और ठोस उपाय करे।’’

‘डीपफेक’ कृत्रिम मेधा (एआई) के उपयोग से तैयार किया गया या मीडिया का वह अवास्तविक रूप है, जिसका उपयोग ऑडियो और विज़ुअल कंटेंट के माध्यम से लोगों को बहकाने अथवा गुमराह करने के लिये किया जा सकता है।

समाजवादी पार्टी के रामजीलाल सुमन ने कहा कि पूरे देश में आलू किसानों की हालत बहुत खराब है लेकिन इसके बावजूद सरकार की ओर से उचित कदम नहीं उठाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि आलू की लागत 1,600 रुपये प्रति क्विंटल आती है और पिछली बार उत्तर प्रदेश की सरकार द्वारा घोषित खरीद मूल्य 459 रुपया प्रति क्विंटल था। उन्होंने कहा, ‘‘इससे बड़ा मजाक दूसरा नहीं हो सकता है।’’

उन्होंने कहा कि ‘दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति’ यह है कि आलू को खाद्यान्न में शामिल नहीं किया गया जबकि आलू उत्पादन में हिंदुस्तान का दुनिया में तीसरा स्थान है।

सपा सदस्य ने कहा कि देश में आलू उत्पादक किसानों को उनकी फसल का 65 प्रतिशत मूल्य ही मिल पाता है जबकि 35 फ़ीसदी आलू सड़ जाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं भारत सरकार से मांग करता हूं कि आलू को बागवानी से हटाकर खाद्य में शामिल किया जाए। उच्च गुणवत्ता के बीज देश में उपलब्ध हों, जिससे निर्यात हो सके। आलू अनुसंधान केंद्र खोले जाएं और चीन की तरह आलू बोर्ड का गठन किया जाए और साथ ही आलू प्रसंस्करण की व्यवस्था की जाए।’’

भाजपा के गोविंद भाई लालजी भाई ढोलकिया ने सूरत के हीरा उद्योग से जुड़ी परेशानियों को उठाया और गुजरात श्रम योगी कल्याण बोर्ड की तर्ज पर रत्न कलाकार कल्याण बोर्ड का गठन किए जाने की मांग की।

उन्होंने कहा, ‘‘सूरत का हीरा उद्योग प्रत्यक्ष रूप से 10 लाख रत्न कलाकार और अप्रत्यक्ष रूप से 50 लाख लोगों को आजीविका प्रदान करता है लेकिन यह उद्योग गंभीर संकट से गुजर रहा है। लाखों रत्न कलाकार बेरोजगारी और वेतन कटौती झेल रहे हैं। उद्योग से जुड़े दो-तीन लाख परिवार है, इस मंदी से प्रभावित हैं।’’

उन्होंने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री से अनुरोध किया कि रत्न कलाकार कल्याण बोर्ड का गठन किया जाए जिससे रत्न कलाकारों के लिए स्वास्थ्य बीमा, शिक्षा और सुरक्षित भविष्य की व्यवस्था हो सके।

उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ रत्न कलाकारों तक पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, रत्न कलाकारों को पेशेवर कर से मुक्त किया जाए, उन्हें कम ब्याज दर पर ऋण दिया जाए और आवासीय ऋण पर ब्याज में रियायत दी जाए।

उन्होंने इस संकट से उबर के लिए एक समिति गठित किए जाने और इस विषय पर त्वरित निर्णय लेकर आवश्यक कदम उठाने का भी अनुरोध किया।

कांग्रेस के अनिल कुमार यादव ने हैदराबाद स्थित मूसी नदी की स्थिति का मुद्दा उठाया और कहा कि कभी यह नदी हैदराबाद और आसपास के लोगों के लिए पीने का पानी और सिंचाई का सबसे बड़ा स्रोत था।

उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों की उदासीनता के कारण यह नदी आज ‘नाले’ में तब्दील हो गई है और बड़ी संख्या में लोग इससे बीमार हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बार-बार केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि वह इस नदी के कल्याण के लिए कोष आवंटित करे लेकिन केंद्र सरकार से किसी तरह का कोई समर्थन नहीं मिला है।

उन्होंने केंद्र से जल्द से जल्द इस नदी के कायाकल्प के लिए कोष जारी करने का आग्रह किया।

कांग्रेस की ही जेबी माथेर हिशाम ने केरल में युवाओं के नशे की लत का शिकार होने का मुद्दा उठाया और सरकार से इस दिशा में ठोस कदम उठाने का आग्रह किया।

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