देश की खबरें | राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के प्रदर्शन में गिरावट, लगातार अच्छे नतीजे देने में नाकाम
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नयी दिल्ली, 11 अक्टूबर राष्ट्रीय टीम का प्रदर्शन देश में किसी खेल की प्रगति का प्रतिबिंब होता है और अगर इस मापदंड पर चलें तो यह कहना गलत नहीं होगा कि हाल के समय में भारतीय पुरुष फुटबॉल टीम के प्रदर्शन में गिरावट आई है।
मौजूदा सैफ चैंपियनशिप में रविवार को नेपाल पर एक गोल से जीत को छोड़ दिया जाए तो टूर्नामेंट में भारत का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है और टीम उन देशों के खिलाफ जीत दर्ज करने में भी नाकाम रही है जिनके खिलाफ अतीत में उसने दबदबा बनाया था।
भारत ने यह टूर्नामेंट रिकॉर्ड सात बार जीता है लेकिन कम रैंकिंग वाले बांग्लादेश और श्रीलंका के खिलाफ लगातार दो ड्रॉ के बाद वह टूर्नामेंट से जल्द बाहर होने की कगार पर है।
क्षेत्रीय टूर्नामेंट में बने रहने के लिए टीम की जद्दोजहद बताती है कि वह किस दिशा में जा रही है।
लेकिन अगर नेपाल के खिलाफ जीत नहीं मिलती, सुनील छेत्री अगर 82वें मिनट में गोल नहीं करते तो।
यह सही है कि खेल के संपूर्ण विकास के लिए राष्ट्रीय टीम के प्रदर्शन के अलावा ठोस युवा विकास कार्यक्रम और प्रतिस्पर्धी लीग ढांचा भी जरूरी है।
मालदीव में चल रहे सैफ टूर्नामेंट में पुरुष टीम के लचर प्रदर्शन से सीनियर टीम और इसके मुख्य कोच इगोर स्टिमक समीक्षा के दायरे में आ गए हैं।
टीम को मौजूदा हालात से बाहर निकालने के लिए अधिकारी कोई फैसला करें इससे पहले जरूरी है कि शीर्ष पर देखने की जगह जमीनी स्तर पर देखने की रणनीति अपनाई जाए और पूर्व मुख्य कोच बॉब हॉटन के निष्कर्षों को याद किया जाए।
अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) का शीर्ष पर ध्यान देने का रवैया विफल होता नजर आ रहा है जिसमें वैश्विक संचालन संस्था फीफा के टूर्नामेंटों के आयोजन के लिए दावा पेश करना और इनका आयोजन शामिल है। इस रवैये से देश में राष्ट्रीय टीम के स्तर में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा।
इस रवैये से कभी सुधार होने की उम्मीद ही नहीं थी। इसके विपरीत जब से प्रशासकों ने प्राथमिकता के आधार पर बड़े टूर्नामेंटों की दावेदारी पेश करने और इनके आयोजन पर ध्यान दिया है तब से राष्ट्रीय टीम के प्रदर्शन में गिरावट आई है।
फीफा और दक्षिण एशियाई फुटबॉल के अलावा एआईएफएफ के लिए वर्षों तक काम करने वाले शाजी प्रभाकरन भी इससे सहमत हैं। उन्होंने कहा, ‘‘युवा विकास और सिर्फ युवा विकास आगे बढ़ने का तरीका है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ शीर्ष स्तर पर ध्यान देने के रवैये से काम नहीं चलेगा, इससे सिर्फ उत्साह पैदा करने में मदद मिलती है। प्राथमिकता युवा विकास को दी जानी चाहिए।’’ राष्ट्रीय राजधानी में फुटबॉल की संचालन संस्था फुटबॉल दिल्ली के प्रमुख शाजी ने एआईएफएफ से अपील की कि सभी हितधारकों के साथ मिलकर चला जाए।
अब सब कुछ केंद्रीय स्तर पर होता है और राज्य इकाइयां लगातार कमजोर हो रही हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘10 साल पहले ऐसा नहीं था, राज्य पूरी प्रक्रिया का हिस्सा होते थे। बिना संसाधनों के हम पहले बेहतर कर रहे थे क्योंकि हम एकजुट होकर काम करते थे, अब कोई टीम वर्क नहीं है, फुटबॉल के विकास पर कोई बैठक नहीं होती और बातचीत नहीं होती। ’’
भारत से काफी कम संसाधन और बुनियादी ढांचे के साथ दुनिया की टीमों में काफी सुधार आया है।
इसका उदाहरण वियतनाम है जो अभी 2022 फीफा विश्व कप क्वालीफायर के तीसरे दौर में खेल रहा है जबकि कुछ साल पहले सीरिया रूस में हुए विश्व कप के लिए क्वालीफाई करने के करीब पहुंच गया था।
एशियाई स्तर पर दक्षिण कोरिया, जापान, ईरान और यहां तक कि इराक काफी आगे निकल गए हैं जबकि भारत महाद्वीप की सर्वश्रेष्ठ टीमों को बराबरी की टक्कर देने के बाद पिछड़ गया है।
कुछ साल पहले कहानी अलग थी। हॉटन के मार्गदर्शन में टीम ने तीन टूर्नामेंट जीते और इस दौरान सीरिया और लेबनान जैसी सम्मानित टीमों को हराया। टीम साथ ही 24 साल बाद एएफसी एशियाई कप के लिए क्वालीफाई करने में सफल रही।
स्टीफन कोन्सटेनटाइन के मार्गदर्शन में टीम का रिकॉर्ड अजेय अभियान चला और टीम एशियाई कप में जगह बनाने में सफल रही। इसके बाद प्रदर्शन में गिरावट आई।
कोन्सटेनटाइन के उत्तराधिकारी स्टिमक को हाल के समय में नतीजे नहीं देने के लिए अपनी रवैये के कारण आलोचना का सामना करना पड़ा है।
वर्ष 2011 में टीम से बाहर किए जाने के दो साल बाद नाराज हॉटन ने टिप्पणी की थी, ‘‘आप कोच को हटा सकते हो और गुस हिडिंक या जोस मोरिन्हो को ला सकते हो और फिर भी आप 140 (रैंकिंग) की टीम रहोगे (उस समय की रैंकिंग)।’’
निश्चित तौर पर हॉटन की हताशा देश में खेल के प्रभारियों के प्रति थी।
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(The above story first appeared on LatestLY on Oct 11, 2021 03:24 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

