जरुरी जानकारी | देशी तेल-तिलहन में गिरावट, पाम, पामोलीन में सुधार
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. दिल्ली के तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले सरसों एवं मूंगफली तेल-तिलहन और सोयाबीन तिलहन के दाम गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि कच्चा पामतेल (सीपीओ), पामोलीन मजबूत रहे। सोयाबीन तेल और बिनौला तेल के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।
नयी दिल्ली, पांच मार्च दिल्ली के तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले सरसों एवं मूंगफली तेल-तिलहन और सोयाबीन तिलहन के दाम गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि कच्चा पामतेल (सीपीओ), पामोलीन मजबूत रहे। सोयाबीन तेल और बिनौला तेल के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।
बाजार सूत्रों ने कहा कि देशी तेल-तिलहन के बाजार टूटे पड़े हैं क्योंकि इनकी लागत आयातित तेलों से काफी अधिक है। दूसरी ओर कम आयात के कारण आपूर्ति प्रभावित होने के बीच सस्ते आयातित खाद्य तेल प्रीमियम दाम पर बिक रहे हैं। आगे मांग बढ़ने पर बहुत विषम स्थिति पैदा हो सकती है।
मलेशिया एक्सचेंज में सुधार चल रहा है जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में सामान्य घट-बढ़ की स्थिति है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने बजट में देशी तेल- तिलहन का उत्पादन बढ़ाने और इस मामले में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने की मंशा जताई है। लेकिन वास्तविक स्थिति देखें तो सरसों, सूरजमुखी, देशी सोयाबीन, मूंगफली और बिनौला सभी अपने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे दाम पर बिक रहे हैं। दूसरी ओर आपूर्ति की कमी के बीच आयातित तेल 10 प्रतिशत प्रीमियम दाम पर बिक रहे हैं। जब किसानों को उनके वाजिब दाम और लागत से ऊंपर दाम नहीं मिलेंगे तो वे उस फसल की खेती छोड़कर ऐसी फसल का रुख कर लेंगे जो उन्हें फायदा पहुंचाये। ऐसे में तिलहन उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर सरकार अगर सोचती है कि सस्ते आयातित तेलों के थोक दाम में गिरावट से उपभोक्ताओं को सस्ता खाद्य तेल मिल पायेगा तो वास्तविक स्थिति इसके ठीक उलट है। अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) ऊंचा निर्धारित किये जाने की वजह से खुदरा में यही सस्ता आयातित तेल उपभोक्ताओं को काफी ऊंचे दाम में खरीदना पड़ रहा है। इसकी एक और वजह कम आयात होने से खाद्य तेलों की आपूर्ति का संकट भी है। तेल- तिलहन मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए इन विसंगतियों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 5,315-5355 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,025-6,300 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 14,750 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,210-2,485 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 10,050 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,705-1,805 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,705 -1,810 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,475 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,025 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,800 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,650 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,100 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,850 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 8,850 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 4,550-4,570 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 4,350-4,390 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,050 रुपये प्रति क्विंटल।
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