जरुरी जानकारी | सस्ते खाद्यतेलों का आयात बढ़ने से खाद्य तेल-तिलहनों में गिरावट
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशी बाजारों में गिरावट के रुख से दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, बिनौला, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन सहित लगभग सभी तेल-तिलहनों की कीमतों में गिरावट रही।
नयी दिल्ली, 17 जनवरी विदेशी बाजारों में गिरावट के रुख से दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, बिनौला, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन सहित लगभग सभी तेल-तिलहनों की कीमतों में गिरावट रही।
बाजार सूत्रों ने कहा कि सरकार के आयातित तेलों पर शुल्क लगाये जाने के कयास से मलेशिया एक्सचेंज में 1.25 प्रतिशत की गिरावट आई जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में 0.12 प्रतिशत की गिरावट रही।
सूत्रों ने कहा कि देश में सस्ते आयातित तेलों की भरमार है और सरसों की आगामी फसल काफी बेहतर होने की उम्मीद है। यानी पहले के बचे हुए स्टॉक को आगामी फसल से मिलाकर, देश में लगभग 125 लाख टन का सरसों तिलहन का स्टॉक हो जायेगा।
सोयाबीन के साथ साथ सरसों के खपने की मुश्किलों को देखते हुए कम से कम सूरजमुखी जैसे हल्के तेलों पर आयात शुल्क अधिकतम सीमा तक बढ़ाकर लगाया जाना चाहिये। ऐसी स्थिति में ही हमारे देशी सोयाबीन और सरसों की खपत हो पायेगी। कच्चा पामतेल की खपत गरीब उपभोक्ताओं में होती है इसलिए उसके आयात शुल्क में मामूली वृद्धि भी की जाये तो गरीबों को तेल सस्ता ही मिलने का अनुमान है लेकिन नरम तेलों (सॉफ्ट आयल) पर अधिकतम सीमा तक आयात शुल्क लगाना फौरी जरुरत है।
सूत्रों के अनुसार देश के एक प्रमुख तेल संगठन का कहना है कि वर्ष 2021 के अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के मुकाबले वर्ष 2022 के समान महीनों में सोयाबीन के 10 लाख टन की अधिक पेराई हुई। ऐसे में इस तेल संगठन को यह भी बताना चाहिये कि वर्ष 2022 के अक्टूबर नवंबर के मात्र दो महीनों में सभी खाद्यतेलों के आयात में लगभग छह लाख टन यानी करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि क्यों हुई है?
वर्ष 2021 के नवंबर-दिसंबर में सभी खाद्यतेलों का आयात 24 लाख टन का हुआ था जो वर्ष 2022 के नवंबर-दिसंबर में करीब 25 प्रतिशत बढ़कर 30.11 लाख टन हो गया।
सूत्रों ने कहा कि कुछेक अन्य तेल संगठनों का मानना है कि देश में तेल पेराई करने वाले मिलों को पेराई में लगभग 5-6 रुपये किलो का नुकसान है। यानी मिल वालों को तिलहन ऊंचे दाम पर मिलते हैं और तेल के बाजार के दाम कहीं नीचे हैं। सस्ते आयातित तेलों की वजह से तेल के थोक दाम टूटे हुए हैं। ऐसे में देश के तिलहन उत्पादक किसानों के फसल कैसे खपेंगे इस पर गंभीरता से विचार करने की जरुरत है।
सूत्रों ने कहा कि सरकार की ओर से सभी तेल कंपनियों को नियमित रूप से हर महीने अपने अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) की जानकारियां सरकारी वेबसाइट पर डालने का निर्देश देना चाहिये। वेबसाइट पर जानकारियां सार्वजनिक होने से सरकार तेल कीमतों की घट बढ़ और तेल कंपनियों द्वारा खाद्यतेल के मूल्य में कमी और बढ़ोतरी का जब चाहे जायजा ले सकेगी और इससे खाद्यतेलों की महंगाई भी थमेगी।
मंगलवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 6,630-6,680 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,615-6,675 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 15,650 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,470-2,735 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 13,150 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 2,000-2,130 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 2,060-2,185 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,050 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 12,900 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,450 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,340 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 11,650 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,980 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 8,980 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,530-5,630 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 5,275-5,295 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
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(The above story first appeared on LatestLY on Jan 17, 2023 06:52 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

