Nithari Murder Case: निठारी हत्याकांड के पीड़ितों का मुकदमा लड़ेगी डीडीआरडब्ल्यूए

चर्चित निठारी हत्याकांड के पीड़ितों की ओर से डीडीआरडब्लूए फेडरेशन ने उच्चतम न्यायालय में मुकदमा लड़ने का फैसला किया है. यह जानकारी सोमवार को डीडीआरडब्ल्यूए के अध्यक्ष एम.पी.सिंह ने दी. निठारी हत्याकांड से जुड़े मामलों में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा बरी किये जाने के बाद गत शुक्रवार को मोनिंदर सिंह पंढेर को ग्रेटर नोएडा की लुक्सर जेल से रिहा कर दिया गया था.

Nithari Killings | PTI

नोएडा(उप्र), 24 अक्टूबर : चर्चित निठारी हत्याकांड (Nithari Murder Case) के पीड़ितों की ओर से डीडीआरडब्लूए फेडरेशन ने उच्चतम न्यायालय में मुकदमा लड़ने का फैसला किया है. यह जानकारी सोमवार को डीडीआरडब्ल्यूए के अध्यक्ष एम.पी.सिंह ने दी. निठारी हत्याकांड से जुड़े मामलों में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा बरी किये जाने के बाद गत शुक्रवार को मोनिंदर सिंह पंढेर को ग्रेटर नोएडा की लुक्सर जेल से रिहा कर दिया गया था.

डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट रेजिडेंशियल वेलफेयर फेडरेशन (डीडीआरडब्ल्यूए) की टीम सोमवार को निठारी गांव जाकर पीड़ित परिवार के लोगों से मुलाकात की और उनसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए. टीम ने मामले को उच्चतम न्यायालय तक ले जाने का आश्वासन भी दिया. टीम ने पीड़ित झब्बू, उनकी पत्नी सुनीता, रामकृष्ण और जमुना प्रसाद से मुलाकात की. टीम ने यह भी कहा कि निठारी हत्याकांड के आरोपी रहे पंढेर और उसके नौकर को शहर में घुसने नहीं दिया जाएगा. यह भी पढ़ें : Death at Garba Event in Gujarat: सूरत में गरबा खेलते समय बेहोश हुआ शख्स, डॉक्टरों ने किआ मृत घोषित

दिसंबर 2006 में पंढेर को उसकी कोठी के पीछे नाले से कंकाल मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया था. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने मामले में 19 प्राथमिकी दर्ज की थी. निचली अदालत ने पंढेर को दो मामलों में फांसी की सजा सुनाई थी लेकिन 16 अक्टूबर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उसे दोनों मामलों में बरी कर दिया. डीडीआरडब्लूए के अध्यक्ष एम.पी. सिंह ने बताया कि यह केस वह तथा उनकी टीम उच्चतम न्यायालय में लड़ेगी.

Share Now

संबंधित खबरें

Supreme Court on Abetment to Suicide: लिव-इन पार्टनर से शादी से इनकार आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं; सुप्रीम कोर्ट ने छह आरोपियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही की रद्द

‘अपराधियों में ऐसा खौफ पैदा करें कि दोबारा सोचने की हिम्मत न हो’: दिल्ली में दुष्कर्म की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट की पुलिस को सख्त हिदायत

'यह संविधान के मूल पर सीधा प्रहार है': मताधिकार छीनने पर बोले सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां; 'बिना नोटिस और सुनवाई के वोटर लिस्ट से नाम नहीं कट सकता'

Social Media Ban for Minors: क्या भारत में 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर लगेगा बैन? सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने दिए कड़े नियमों के संकेत