देश की खबरें | गैर चिन्हित वन क्षेत्र में अनधिकृत कॉलोनी को नियमित करने से पहले रिकॉर्ड जांचे डीडीए: वन विभाग
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नयी दिल्ली, 15 जनवरी वन विभाग ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) से कहा है कि वह केंद्र की पीएम-उदय योजना के तहत अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने से पहले रिकॉर्ड की जांच करे और गैर चिन्हित या संरक्षित वनों में बसी ऐसी कॉलोनियों को सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी के बिना नियमित नहीं करे।
वन विभाग ने 24 नवंबर को डीडीए को लिखे पत्र में कहा कि "ऐसे खसरे हैं जो वानिकी उद्देश्यों के लिए राजस्व रिकॉर्ड में वन विभाग के नाम से दर्ज हैं, लेकिन अभी तक भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत उन्हें वन क्षेत्र या वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित क्षेत्र घोषित नहीं किया गया है।”
‘प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई)’ ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत दायर आवेदन के जरिए इस पत्र को हासिल किया है।
पत्र में कहा गया है कि ऐसी भूमि पर अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का मतलब है कि वन भूमि को गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए बदला जाएगा, जो टीएन गोडावर्मन मामले में उच्चतम न्यायालय के 12 दिसंबर 1996 के आदेश के अनुसार वन संरक्षण अधिनियम 1980 का उल्लंघन होगा।
उसमें कहा गया है कि लिहाज़ा, डीडीए किसी भी अनधिकृत कॉलोनी को नियमित करने से पहले राजस्व रिकॉर्ड की जांच करे।
वन विभाग के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई’ से कहा कि डीडीए ने गैर चिन्हित वन क्षेत्रों और संरक्षित वनों में अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जबकि वन भूमि के दर्जे में बदलाव के लिए उसे सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी लेनी होगी।
इस बाबत डीडीए से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन ‘पीटीआई’ के संदेशों और कॉल का डीडीए की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को ज़मीन का मालिकाना हक देने के लिए दिसंबर 2019 में ‘प्रधानमंत्री अन-ऑथॉराइज़्ड कॉलोनीज़ इन दिल्ली आवास अधिकार योजना’ (पीएम-उदय) की शुरुआत की थी। इससे पहले संसद ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (अनधिकृत कॉलोनियों में निवासियों के संपत्ति अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2019 पारित किया था।
आरटीआई के आवेदन के तहत उपलब्ध कराए गए जवाब के अनुसार, दिल्ली वन विभाग ने डीडीए को यह भी बताया कि डीडीए ने लगभग 1,189 हेक्टेयर संरक्षित वन भूमि में से 286.14 हेक्टेयर ज़मीन का अबतक सीमांकन नहीं किया है।
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