देश की खबरें | डीसीजीआई ने स्वयंसेवी को दी गई कोविड के टीके की खुराक और प्रतिकूल प्रभाव के बीच कोई संबंध नहीं पाया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. चेन्नई में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के कोविड-19 टीके के परीक्षण के दौरान एक स्वयंसेवी पर पड़े कथित तौर पर इसके गंभीर प्रतिकूल प्रभाव की भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) द्वारा शुरू की गई जांच में यह पाया गया है कि उसे दी गई टीके की खुराक से इसका संबंध नहीं है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, दो दिसंबर चेन्नई में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के कोविड-19 टीके के परीक्षण के दौरान एक स्वयंसेवी पर पड़े कथित तौर पर इसके गंभीर प्रतिकूल प्रभाव की भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) द्वारा शुरू की गई जांच में यह पाया गया है कि उसे दी गई टीके की खुराक से इसका संबंध नहीं है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि डीसीजीआई एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर बुधवार को इस निष्कर्ष पर पहुंचा। समिति ने यह सुझाव भी दिया है कि स्वयंसेवी को मुआवजा नहीं दिया जाना चाहिए।

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स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), सफदरजंग अस्पताल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज तथा चंडीगढ़ स्थित पीजीआईएमईआर से एक-एक चिकित्सक शामिल किये गए थे। समिति का गठन डीसीजीआई ने चेन्नई में सीरम इंस्टीट्यूट के एक परीक्षण के दौरान टीके के गंभीर प्रतिकूल प्रभाव के दावे की जांच करने के लिए किया गया था।

उल्लेखनीय है कि पिछले हफ्ते चेन्नई में टीके के तीसरे चरण के परीक्षण में 40 वर्षीय स्वयंसेवी ने टीके की प्रायोगिक खुराक लेने के बाद गंभीर शारीरिक व मनोवैज्ञानिक दुष्प्रभाव के लक्षण नजर आने का दावा किया था। उसने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) एवं अन्य पर आरोप लगाते हुए पांच करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा था। साथ ही, परीक्षण रोकने की भी मांग की थी।

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हालांकि, एसआईआई ने रविवार को इन आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें दुर्भावनापूर्ण करार दिया और कहा कि वह 100 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग करेगा।

समिति ने अपनी सिफारिश में कहा है, ‘‘विशेषज्ञ समिति ने चर्चा के बाद यह विचार प्रकट किया है कि कथित दुष्प्रभाव टीका/क्लीनिकल परीक्षण से जुड़ा नहीं है। इसलिए, समिति का यह विचार है कि व्यक्ति या उसके कानूनी वारिस/ उसके द्वारा नामित को मुआवजा नहीं दिया जाए। ’’

पुणे स्थित टीका निर्माता एसआईआई ने मंगलवार को कहा था कि टीका सुरक्षित है।

संस्थान ने एक ब्लॉग में कहा है, ‘‘हम हर किसी को यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि जब तक टीका प्रतिरक्षक साबित नहीं हो जाता है इसे व्यापक स्तर पर उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। ’’

एसआईआई ने कोविड-19 के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित टीके का उत्पादन करने के लिए ब्रिटिश-स्वीडिश बायोफार्मास्यूटिकल कंपनी एस्ट्राजेनेका के साथ साझेदारी की है।

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