जयपुर, तीन दिसंबर राजस्थान में विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने हर पांच साल में सरकार बदलने का 'रिवाज' कायम रखते हुए 'राज' यानी सरकार को बदल दिया है। राज्य की 200 सीटों वाली विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिल गया है। शाम 6.20 बजे तक भाजपा ने 104 सीटें जीत लीं जबकि 11 पर आगे चल रही है। इस तरह से उसे कुल मिलाकर 115 सीटें मिलती दिख रही हैं।
वहीं, कांग्रेस 69 सीटों पर सिमटती दिख रही है। 60 सीटों पर उसके उम्मीदवार जीत चुके हैं जबकि 9 पर आगे हैं। पांच निर्दलीय जीत चुके हैं, तीन सीटों पर भारत आदिवासी पार्टी के उम्मीदवार जीते हैं।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चुनाव परिणामों को सभी के लिए अप्रत्याशित बताते हुए जनादेश को स्वीकार किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘‘राजस्थान की जनता द्वारा दिए गए जनादेश को हम विनम्रतापूर्वक स्वीकार करते हैं। यह सभी के लिए एक अप्रत्याशित परिणाम है। यह हार दिखाती है कि हम अपनी योजनाओं, कानूनों और नवाचारों को जनता तक पहुंचाने में पूरी तरह कामयाब नहीं रहे।’’
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ने कहा कि यह जीत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, गृहमंत्री अमित शाह के कुशल मार्गदर्शन की जीत है।
भाजपा के जीतने वाले प्रमुख नेताओं में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, लोकसभा सदस्य राज्यवर्धन राठौड़ (झोटवाड़ा), बाबा बालक नाथ (तिजारा) व दीया कुमारी (विद्याधर नगर) शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि राजनीतिक गलियारों में राजस्थान के विधानसभा चुनाव को राज (सरकार) और 'रिवाज’ बदलने की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है। बीते कुछ दशकों में, परंपरागत रूप से राज्य में हर विधानसभा चुनाव में सरकार बदल जाती है... एक बार कांग्रेस, एक बार भाजपा। इस बार भी ऐसा ही हुआ है।
राज्य में 200 में से 199 सीटों पर 25 नवंबर को मतदान हुआ था जहां 75.45 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले। राज्य की करणपुर सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार के निधन के कारण चुनाव स्थगित किया गया है।
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