ताजा खबरें | मौजूदा डाकघर विधेयक औपनिवेशिक युग के कानून की तुलना में कहीं अधिक हानिकारक : थरूर
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नयी दिल्ली,13 दिसंबर कांग्रेस ने डाकघर विधेयक, 2023 को ‘आधा-अधूरा’ करार देते हुए बुधवार को कहा कि यह मसौदा कानून औपनिवेशिक काल के कानून की तुलना में भारतीयों के मौलिक अधिकारों के लिए "कहीं अधिक हानिकारक" है।
एक सौ पच्चीस साल से अधिक पुराने भारतीय डाकघर कानून को निरस्त करने वाले डाकघर विधेयक, 2023 पर लोकसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार की आलोचना की और कहा, ‘‘पिछले करीब एक दशक में अक्सर देखा गया है कि (यह) सरकार हमारे मनोमस्तिष्क को उपनिवेश-मुक्त करने और औपनिवेशिक युग के कानूनों को अद्यतन करने की आड़ में ऐसा कानून ला रही है, जो कमोबेश ‘मनमाना और अनुचित’ है।’’
इस विधेयक का उद्देश्य देश में डाकघरों से संबंधित उपनिवेश काल के कानून में संशोधन करना है।
प्रस्तावित कानून के अनुसार, "केंद्र सरकार, अधिसूचना द्वारा, किसी भी अधिकारी को राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों, लोक व्यवस्था, आपातकाल या सार्वजनिक सुरक्षा के हित में किसी भी डाक सामग्री को रोकने, उसके पैकेट को खोलने या संबद्ध व्यक्ति को हिरासत में लेने का अधिकार दे सकती है।"
थरूर ने कहा कि भले ही यह (विधेयक) औपनिवेशिक विधेयक को संशोधित करने का प्रयास करता है, लेकिन इसमें ऐसे प्रावधान बरकरार रखे गये हैं जो कठोर और औपनिवेशिक प्रावधानों से अलग नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में भारतीय डाक के अधिकारियों को जवाबदेही के बोझ से बचा लिया गया है।
संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा पेश विधेयक पर चर्चा करते हुए थरूर ने कहा कि मंत्री के प्रति वह बहुत सम्मान रखते हैं लेकिन ‘इस आधे-अधूरे संशोधन’ को देखकर निराश हैं।
थरूर ने कहा कि सरकार इस विधेयक के माध्यम से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत गारंटीकृत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नागरिकों के अधिकार का ‘उल्लंघन’ करने के लिए खुद को व्यापक शक्तियां प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने पुट्टुस्वामी मामले में निजता के अधिकार को अनुच्छेद 21 में निहित जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार का एक उपसमूह माना है।
उन्होंने कहा, "...यह विधेयक औपनिवेशिक युग के कानून की तुलना में भारतीयों के मौलिक अधिकारों के लिए कहीं अधिक हानिकारक है।"
उन्होंने जोर देकर कहा कि विधेयक में कोई शिकायत निवारण तंत्र नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने किसी डाक सामग्री और खेप को रोकने, संबंधित व्यक्ति को हिरासत में लेने या वस्तु को नष्ट करने के मामले में भारतीयों को अंधेरे में रखकर और उन्हें इन फैसलों का विरोध करने की अनुमति न देकर नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों और कानून की उचित प्रक्रिया का उल्लंघन किया है।’’
कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘इस संबंध में, 2023 का यह विधेयक हमारे संविधान के अनुच्छेद 14 का भी उल्लंघन है।’’
चर्चा में हिस्सा लेते हुए भारतीय जनता पार्टी के तापिर गाव ने कहा कि पिछली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के कार्यकाल में 664 डाकघर बंद किये गये, जबकि 2014 के बाद से 5,000 डाकघर खोले गये हैं और 5,576 डाकघर और खोलने की अनुमति दी गयी है।
उन्होंने इसे नागरिक को केंद्र में रखकर बनाया गया विधेयक करार दिया।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह दूरदराज के पर्वतीय इलाकों के लोगों के लिए ‘डाक सेवा केंद्र’ खोले, ताकि गरीब जनता भी इसका लाभ उठा सके।
लोकसभा की सुरक्षा में चूक की घटना को लेकर सर्वदलीय बैठक आयोजित किये जाने के कारण यह चर्चा अधूरी रही।
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