देश की खबरें | सीआरपीएफ ने जम्मू में 83वीं स्थापना दिवस परेड आयोजित की, पहली बार आयोजन दिल्ली के बाहर

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जम्मू, 19 मार्च केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने शनिवार को पहली बार दिल्ली से स्थापना दिवस परेड का आयोजन किया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू में मार्च पास्ट की सलामी ली।

सीआरपीएफ के महानिदेशक कुलदीप सिंह के साथ, गृह मंत्री ने जम्मू के मौलाना आजाद स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न श्रेणियों में बल के कर्मियों को वीरता पदक और ट्राफी प्रदान कीं।

सीआरपीएफ के 83वें स्थापना दिवस परेड में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पंकज मिथल, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिदेशक पंकज सिंह और जम्मू कश्मीर पुलिस के महानिदेशक दिलबाग सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।

पहली बार सीआरपीएफ दिवस परेड केंद्र सरकार के निर्णय के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में उसके मुख्यालय के बाहर आयोजित की गई।

बड़ी संख्या में सीआरपीएफ कर्मियों और उनके परिवार के सदस्यों और स्कूली बच्चों ने शानदार परेड देखी, जिसके बाद बल की महिला टुकड़ी द्वारा विभिन्न पारंपरिक खेल प्रदर्शन और ‘मोटरसाइकिल स्टंट’ किए गए।

नारंगी रंग की पगड़ी पहने शाह ने परेड के दौरान अपने संबोधन में कहा, ‘‘आज 3.25 लाख जवानों वाले इस बल को आंतरिक सुरक्षा और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खुद को समर्पित करना चाहिए और सीआरपीएफ के महान इतिहास को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि सरकार ने फैसला किया है कि सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की वार्षिक परेड देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित की जाएगी। शाह ने कहा, ‘‘...देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा में लगे सभी सीएपीएफ को देश के विभिन्न हिस्सों में जाना चाहिए और लोगों के साथ अच्छे संबंध बनाने चाहिए तथा देश के विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृति के साथ घुलना-मिलना चाहिए और हमेशा की तरह खुद को कर्तव्य के लिए समर्पित करना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर से ही पंडित प्रेम नाथ डोगरा तथा श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कहा था कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और देश में दो प्रमुख, दो प्रतीक चिह्न और दो विधान मौजूद नहीं हो सकते।

गृह मंत्री ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक प्रमुख, एक प्रतीक चिह्न और एक विधान, जो मुखर्जी और डोगरा के दोनों के सपने थे, का सपना पूरा हुआ है।’’

उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ के गठन के बाद से अब तक इसके 2,340 कर्मियों ने देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया है।

शाह ने मरणोपरांत सम्मान पाने वाले सीआरपीएफ कर्मियों के परिवारों को आश्वासन दिया कि उनका बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘सीआरपीएफ ने देश और देशवासियों की सुरक्षा को अपने से ऊपर मानने की परंपरा स्थापित की है। मुझे विश्वास है कि सीआरपीएफ के जवान उसी समर्पण के साथ इस परंपरा को आगे बढ़ाएंगे।’’

शाह ने कहा, ‘‘आज सीआरपीएफ 246 बटालियन और 3.25 लाख जवानों के साथ देश का सबसे बड़ा सशस्त्र बल है और जिसकी विश्वसनीयता न केवल देश में बल्कि दुनिया के सभी सशस्त्र बलों द्वारा पहचानी जाती है।’’

सीआरपीएफ के महानिदेशक ने कहा कि अतीत में आतंकवादियों और नक्सलियों द्वारा किए गए सबसे भीषण हमलों का सामना करने में सीआरपीएफ ने अपनी ताकत दिखाई है।

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