देश की खबरें | गलत तरह से अंग निकालने के मामले में केरल के निजी अस्पताल के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही

कोच्चि, 15 जून वर्ष 2009 में एक दुर्घटना पीड़ित के अंग अनधिकृत तरीके से निकालने के मामले में आपराधिक कार्यवाही का सामना कर रहे कोच्चि के एक अस्पताल ने रोगी को गलत तरह से ‘ब्रेन डैड’ घोषित करने और कानून का उल्लंघन करते हुए उसके अंग निकालने के आरोपों को खारिज किया है।

एर्णाकुलम की एक मजिस्ट्रेटी अदालत ने 29 मई को लेकशोर अस्पताल के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने का फैसला किया था जिसे अब वीपीएस लेकशोर के नाम से जाना जाता है। अस्पताल के आठ चिकित्सकों के खिलाफ भी कार्यवाही शुरू करने का फैसला किया गया जिनमें पीड़ित की जांच करने वाले न्यूरोसर्जन और अंग प्रतिरोपण दल भी शामिल है।

अदालत के आदेश के मद्देनजर वीपीएस लेकशोर ने बयान जारी कर इस बात से इनकार किया कि डॉक्टरों ने तब पीड़ित के मस्तिष्कीय रूप से मृत (ब्रेन डैड) होने का प्रमाणपत्र गलत तरीके से जारी किया था। पीड़ित को 2009 में एक दुर्घटना में सिर में गंभीर चोट लगी थीं।

पीड़ित अभिन वी जे की मोटरसाइकिल 29 नवंबर, 2009 को बिजली के एक पोल से टकरा गयी थी और इस हादसे में उसे चोट आई थीं।

उसे पहले कोथामंगलम के मार बेसेलियस अस्पताल में भर्ती कराया गया और फिर एर्नाकुलम के लेकशोर अस्पताल भेज दिया गया।

कोल्लम के एक डॉक्टर ने खबरों से मिली जानकारी के आधार पर शिकायत की कि पीड़ित को लेकशोर अस्पताल में एक दिसंबर, 2009 को ‘ब्रेन डैड’ घोषित कर दिया गया था और उसके महत्वपूर्ण अंग निकाले गये और यकृत को एक विदेशी नागरिक के शरीर में प्रतिरोपित किया गया।

अस्पताल ने बयान में कहा है कि वह जांच में पूरी तरह सहयोग प्रदान करेगा।

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