देश की खबरें | जांच पूरी करने के लिए और समय देने के खिलाफ इशरत जहां की याचिका पर अदालत का पुलिस को नोटिस

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में साम्प्रदायिक हिंसा के संबंध में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत दर्ज मामले की जांच के लिए 60 दिन का समय औरदेने के फैसले को चुनौती देने वाली कांग्रेस की पूर्व निगम पार्षद इशरत जहां की याचिका पर दिल्ली सरकार से बुधवार को जवाब मांगा।

नयी दिल्ली, 24 जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में साम्प्रदायिक हिंसा के संबंध में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत दर्ज मामले की जांच के लिए 60 दिन का समय औरदेने के फैसले को चुनौती देने वाली कांग्रेस की पूर्व निगम पार्षद इशरत जहां की याचिका पर दिल्ली सरकार से बुधवार को जवाब मांगा।

न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत ने वीडियो कांफ्रेन्सिग के माध्यम से सुनवाई करते हुये दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। उन्होंने पुलिस को 10 दिन के भीतर लिखित दलीलें पेश करने का निर्देश दिया।

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अदालत ने इशरत जहां के वकील को भी लिखित दलीलें और मामले संबंधी कुछ अतिरिक्त दस्तावेज पेश करने की अनुमति दी।

अतिरिक्त लोक अभियोजक अमित चड्ढा ने दिल्ली पुलिस की ओर से नोटिस स्वीकार किया और उत्तर दायर करने के लिए समय मांगा, जिसके बाद अदालत ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए सात जुलाई की तारीख तय की।

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26 फरवरी को गिरफ्तार की गई इशरत जहां ने निचली अदालत के 15 जून के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसके तहत उनके और कार्यकर्ता खालिद सैफी के खिलाफ जांच पूरी करने के लिए पुलिस को 60 और दिन का समय दिया गया।

अदालत को यह बताया गया था कि खालिद ने कथित तौर पर भारत से बाहर जाकर विवादास्पद इस्लामी उपदेशक एवं भगोड़े जाकिर नायक सहित कई अन्य लोगों से मुलाकात की थी ताकि उनके एजेंडे को फैलाने के लिए धन मिल सके।

अभियोजक ने आरोप लगाया था कि इशरत जहां को किसी गुप्त माध्यम से अवैध धन मिला है और खालिद सैफी को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के अलावा विदेशों से भी धन मिला है। पुलिस ने अदालत से जांच के लिए और समय दिए जाने का अनुरोध किया था।

इशरत जहां की ओर से पेश वकील मनु शर्मा ने निचली अदालत के फैसले को दरकिनार किए जाने का अनुरोध करते हुए कहा कि यह ‘‘त्रुटिपूर्ण, कानून के अनुसार गलत और मिथ्या तथ्यों पर आधारित’’ है तथा यह संविधान में प्रदत्त लोकतांत्रिक एवं मौलिक अधिकारों के विरुद्ध है।

याचिका में दावा किया गया है कि अभियोजक ने इस बात का कोई कारण नहीं बताया कि जहां को हिरासत में रखना क्यों आवश्यक है, जो कि यूएपीए के प्रावधानों के तहत अनिवार्य शर्त है। इसके बावजूद सत्र अदालत ने आरोप पत्र दायर करने के लिए और समय दे दिया।

इशरत जहां के वकील ने दावा किया कि उनकी मुवक्किल जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग कर रही है और उन्होंने जांच अधिकारी को पहले ही उस धन के स्रोत के बारे में बता दिया है, जिस पर सवाल उठाया जा रहा है।

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