देश की खबरें | अदालतें न्याय का मंदिर हैं, वादियों के लिए इसके द्वार हमेशा खुले रहने चाहिए: न्यायमूर्ति कौल

नयी दिल्ली, 15 दिसंबर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने शुक्रवार को कहा कि अदालतें न्याय का मंदिर हैं और इसके द्वार वादियों के लिए हमेशा खुले रहने चाहिए क्योंकि कोई आम नागरिक जब शीर्ष अदालत तक पहुंचता है तो वह मुकदमा लड़ते-लड़ते काफी थक चुका होता है।

न्यायमूर्ति कौल शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में छह साल और 10 महीने से अधिक के कार्यकाल के बाद 25 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो जाएंगे।

उन्होंने अपने अंतिम कार्य दिवस पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा आयोजित विदाई समारोह में लोगों को संबोधित किया।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा हमेशा से मानना रहा है कि अदालतें न्याय का मंदिर हैं और इसके द्वार वादियों के लिए हमेशा खुले रहने चाहिए। उच्चतम न्यायालय मुकदमे के लिए आखिरी विकल्प होता है और वादी खासकर जब इस (सर्वोच्च) अदालत में पहुंचते हैं तब तक वे मुकदमा लड़ते-लड़ते थक चुके होते हैं। हालांकि वकील और न्यायाधीश उनके लिए मौजूद रहते हैं।’’

शीर्ष अदालत में अपने दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि यह सर्वोच्च न्यायालय की देन है कि न्याय तक पहुंच हर समय निर्बाध रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘अपने विवादों के समाधान के लिए इस अदालत का दरवाजा खटखटाने वाले वादियों के सामने आने वाली चुनौतियां न्याय प्रदान करते समय हमारे दिमाग में सबसे अहम होनी चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक न्यायाधीश के रूप में अनुभव हासिल किया।

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