देश की खबरें | रजिस्ट्री द्वारा मुकदमों को सूचीबद्ध करने में दुराग्रह के आरोपों से न्यायालय नाखुश
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने प्रभावशाली वकीलों के मुकदमों को विभिन्न पीठों के समक्ष सूचीबद्ध करने के मामले में शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री पर दुराग्रह के आरोप लगाने वाली याचिका पर शुक्रवार को अप्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि यह विभाग वकीलों और वादकारियों के लाभ के लिये ‘दिन रात’ काम करता है।
नयी दिल्ली, 19 जून उच्चतम न्यायालय ने प्रभावशाली वकीलों के मुकदमों को विभिन्न पीठों के समक्ष सूचीबद्ध करने के मामले में शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री पर दुराग्रह के आरोप लगाने वाली याचिका पर शुक्रवार को अप्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि यह विभाग वकीलों और वादकारियों के लाभ के लिये ‘दिन रात’ काम करता है।
न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये अधिवक्ता रीपक कंसल की याचिका पर सुनवाई की और कहा कि इस पर फैसला बाद में सुनाया जायेगा।
कंसल ने अपनी याचिका में उच्चतम न्यायालय के संबंधित अधिकारियों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया है कि वे कोविड-19 के कारण लॉकडाउन की अवधि में, जब न्यायालय वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये काम कर रहा है, प्रभावशाली वकीलों और याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर किये जा रहे मामलों को प्रमुखता नहीं दें।
सुनवाई के दौरान पीठ ने वकील से सवाल किया, ‘‘आप रजिस्ट्री और इसके विभागीय अधिकारियों के खिलाफ इस तरह के गैरजिम्मेदारी वाले आरोप क्यों लगा रहे हैं?’’
इस पर वकील ने कहा कि ‘एक राष्ट्र एक राशन कार्ड’ के मुद्दे पर उसकी याचिका रजिस्ट्री ने अभी तक सूचीबद्ध नहीं की है।
पीठ ने कहा, ‘रजिस्ट्री आप लोगों के लिये दिन रात काम कर रही है। यह अब एक ट्रेंड बन गया है।’’ पीठ ने कहा कि ये याचिकायें दायर नहीं की जानी चाहिए थीं।
इससे पहले, दायर याचिका में शीर्ष अदालत के सेक्रेटरी जनरल और अन्य अधिकारियों को उन वकीलों के साथ भेदभाव नहीं करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था जो इतने प्रभावशाली नहीं है।
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