देश की खबरें | न्यायालय विचार करेगा कि क्या बकाया भुगतान के लिये कुर्क संपत्ति का परिसमापन किया जा सकता है
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 27 अगस्त उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह इस सवाल पर विचार करेगा कि क्या वित्तीय देनदारियों का निबटारा करने के लिये कानूनी कार्यवाही के माध्यम से कुर्क की गयी कंपनी की संपत्ति का परिसमापन करने पर विचार किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति उदय यू ललित और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ को शराब के कारोबारी विजय माल्या की कंपनी यूनाइटेड ब्रेवरीज (होल्डिंग) लि (यूबीएचएल) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी एस वैद्यनाथन ने सूचित किया कि कंपनी की कुल संपत्ति उसकी देनदारियों से कहीं ज्यादा की है।

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यूबीएचएल ने इस कंपनी का कारोबार समेटने के एकल न्यायाधीश के फैसले को बरकरार रखने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के छह मार्च के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है।

इस मामले की वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान वैद्यनाथन ने पीठ से कहा कि उच्च न्यायालय को कंपनी का कारोबार समेटने का आदेश बरकरार नहीं रखना चाहिए था क्योंकि इसकी कुल परिसंपत्ति देनदारियों से कहीं ज्यादा है।

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उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने निबटारा करने की पेशकश स्वीकार नहीं करके और कंपनी का कारोबार समाप्त करने का फैसला बरकरार रख कर गलती की है।

पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा ब्रिटेन में रह रहे भगोड़े विजय माल्या के खिलाफ धन शोधन रोकथाम कानून के तहत की गयी कार्यवाही में कंपनी की संपत्ति जब्त करने के बारे में सवाल किया।

पीठ ने कहा, ‘‘हमें बतायें कि क्या इन संपत्तियों , जिन्हें धन शोधन रोकथाम कानून के तहत कुर्क जब्त किया गया है, को कंपनी का कारोबार समाप्त करने के लिये निर्देश देने की बजाये इसके परिसमापन की कार्यवाही पर विचार किया जा सकता है।’’

पीठ शुरू में यूबीएचएल की अपील पर नोटिस जारी करने की इच्छुक थी । पीठ को बैकों के संगठन की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि इस मामले में नोटिस जारी नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत की अदालतों में चल रही कार्यवाही का विजय माल्या प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में दुरूपयोग कर रहे हैं और न्यायालय को इस मामले में हस्तक्षेप नही करना चाहिए।

पीठ ने मेहता को ध्यान दिलाया कि वह सरकार की ओर से नही बल्कि बैंकों की ओर से पेश हो रहे हैं और यह धन शोधन रोकथाम कानून के तहत कार्यवाही नहीं है।

मेहता ने कहा कि वह इस तथ्य से वाकिफ हैं लेकिन राष्ट्रहित में उनका कर्तव्य सिर्फ इस वजह से कम नहीं हो जाता कि वह बैंकों की तरह से पेश हो रहे हैं।

पीठ ने मेहता से कहा, ‘‘हमारी चिंता इस बात को लेकर है कि वैद्यनाथन कह रहे हैं कि कंपनी की कुछ संपत्ति कुर्क की जा चुकी है जबकि कंपनी का परिसमापन करने की कार्यवाही शुरू हो चुकी है।

मेहता ने कहा कि धनशाधेन संरक्षण कानून के तहत चल रही कार्यवाही एकदम भिन्न है और इस कानून के तहत जब्त की गयी संपत्ति सिर्फ आरोपी को दोषी ठहराये जाने के बाद ही बेची जा सकती है।

पीठ ने कहा कि संपत्ति सिर्फ कुर्क की गयी और इसे जब्त नहीं किया गया है क्योंकि अभी तक दोषसिद्धी नही हुयी है।

पीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति में यह सवाल अभी है कि क्या देनदारियों का भुगतान करने के लिये कुर्क की गयी संपत्ति के परिसमापन पर विचार नहीं किया जा सकता।’’

पीठ ने कहा कि सामान्यत: जहां तक संभव हो, कंपनी के परिसमापन से बचा जाता है। इस पर सालिसीटर जनरल ने कहा कि न्यायालय को यह बात ध्यान रखनी होगी कि वह एक निर्दोष व्यक्ति के नहीं बल्कि एक भगोड़े आरोपी के मामले पर गौर कर रहा है।

पीठ ने टिप्पणी की कि हम किसी व्यक्ति के नहीं बल्कि कंपनी के मामले पर विचार कर रहे हैं।

पीठ ने इस मामले को आठ सितंबर के लिये सूचीबद्ध करते हुय कहा कि अगर जरूरी हुआ तो पक्षकारों को इस सवाल का जवाब देना होगा कि क्या कुर्क की गयी संपत्ति को देनदारियों का भुगतान करने के लिये समाप्त करने पर विचार किया जा सकता है।

उच्च न्यायालय ने छह मार्च को, अब बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस के कर्जों का निबटारा करने का प्रस्ताव ठुकरा दिया था। यूबीएचएल ने दावा किया था कि उसकी परिसंपत्तियों की बाजार में कीमत उसकी देनदारियों से कहीं ज्यादा है।

अनूप

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