अहमदाबाद, 26 मई गुजरात उच्च न्यायालय की एक विशेष पीठ ने रविवार को राजकोट के एक गेम जोन में आग लगने की घटना का स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे प्रथम दृष्टया "मानव निर्मित आपदा" बताया है। इस हादसे में 27 लोगों की मौत हो गई थी।
न्यायमूर्ति बीरेन वैष्णव और न्यायमूर्ति देवन देसाई की खंडपीठ ने कहा कि ऐसे गेमिंग जोन और मनोरंजक सुविधाएं सक्षम अधिकारियों से आवश्यक मंजूरी के बिना बनाए गए हैं।
पीठ ने अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और राजकोट नगर निगमों के अधिवक्ताओं को निर्देश दिया कि वे सोमवार को उसके समक्ष इस निर्देश के साथ उपस्थित हों कि कानून के किन प्रावधानों के तहत अधिकारियों ने इन इकाइयों को अपने अधिकार क्षेत्र में स्थापित किया या संचालित करना जारी रखा।
अधिकारियों के मुताबिक, राजकोट में शनिवार शाम लगी भीषण आग में 27 लोगों की मौत हो गयी थी, जिसमें 12 साल से कम उम्र के चार बच्चे भी शामिल थे। इस हादसे में तीन लोग घायल हो गए। ये सभी यहां गेम जोन में गर्मियों की छुट्टियों का आनंद ले रहे थे।
न्यायालय ने कहा, ‘‘हम समाचार पत्रों की रिपोर्ट पढ़कर आश्चर्यचकित हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि राजकोट में गेमिंग जोन को बनाने में गुजरात समग्र सामान्य विकास नियंत्रण विनियम (जीडीसीआर) में खामियों का फायदा उठाया गया है। जैसा कि समाचार पत्रों में छपा है कि ये गेमिंग जोन सक्षम अधिकारियों से आवश्यक अनुमोदन लिये बिना बने हैं।’’
अदालत ने कहा कि अखबारों की रिपोर्ट से पता चलता है कि ये मनोरंजन क्षेत्र सक्षम अधिकारियों से आवश्यक मंजूरी के बिना बनाए गए हैं।
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