देश की खबरें | न्यायालय ने विधानसभा अध्यक्ष के आदेश के खिलाफ शुभेंदु अधिकारी की याचिका पर कड़ा ऐतराज जताया

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नयी दिल्ली, 24 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने विधायक मुकुल रॉय को अयोग्य नहीं ठहराने के पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता शुभेंदु अधिकारी द्वारा बार-बार याचिकाएं दायर करने पर शुक्रवार को कड़ी आपत्ति जताई।

न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने अधिकारी की ओर से इस मामले में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सी एस वैद्यनाथन से कहा, ‘‘यह तरीका नहीं है। आपने पहले भी इसी तरह की याचिका दायर की थी और बाद में उसे वापस ले लिया था। आपको पता है कि इस मुद्दे पर उच्च न्यायालय के समक्ष एक रिट याचिका लंबित है। आप इस तरह उच्च न्यायालय को दरकिनार नहीं कर सकते। हम इस पर कड़ी आपत्ति जताते हैं।’’

वैद्यनाथन ने अदालत से माफी मांगी लेकिन कहा कि वर्तमान अर्जी 11 अप्रैल, 2022 को उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली एक अन्य याचिका के रूप में दायर की गई थी, जो शीर्ष अदालत के समक्ष लंबित है।

पीठ ने वैद्यनाथन से कहा कि वह वरिष्ठ वकील हैं और उन्हें माफी मांगने की जरूरत नहीं है लेकिन वह ये टिप्पणियां कर रही हैं क्योंकि उसे याचिकाकर्ता द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया ठीक नहीं लगी।

पीठ ने कहा, ‘‘यहां एक व्यवस्था है। आप पिछले साल भी यहां आए थे और फिर आपने यह कहते हुए अपनी याचिका वापस लेने का फैसला किया कि आप उच्च न्यायालय के समक्ष उपाय तलाशेंगे।’’ साथ ही पीठ ने कहा कि अधिकारी द्वारा विधानसभा अध्यक्ष के 2022 के आदेश को वापस ले लिया गया।

पिछले साल 8 जून को, पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने अधिकारी द्वारा उन्हें एक शिकायत देने के बाद फैसला सुनाया था कि रॉय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक थे, जो 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद पाला बदल कर तृणमूल कांग्रेस में चले गए।

वैद्यनाथन ने कहा कि वह पीठ के समक्ष सूचीबद्ध दो याचिकाओं को वापस लेना चाहेंगे, जिनमें एक याचिका विधानसभा अध्यक्ष के आदेश को चुनौती देने वाली भी है।

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 11 अप्रैल, 2022 को नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया था। अधिकारी ने दल-बदल के आधार पर रॉय को सदन के सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित करने और मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए बहाल करने का अनुरोध किया था।

अधिकारी ने एक अलग याचिका में उच्च न्यायालय के 11 अप्रैल, 2022 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था।

पिछले साल आठ जून को बनर्जी ने रॉय को अयोग्य ठहराने की अधिकारी की अर्जी को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि उन्हें याचिकाकर्ता की दलीलों में कोई दम नजर नहीं आता। विधानसभा अध्यक्ष ने मामले में पूर्व के अपने फैसले पर कायम रखा था।

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