देश की खबरें | जैस्मीन शाह को सरकारी आवास खाली करने के आदेश पर अदालत ने रोक लगाई
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें दिल्ली संवाद एवं विकास आयोग (डीडीसीडी) के पूर्व उपाध्यक्ष जैस्मीन शाह को सरकारी आवास खाली करने के लिए कहा गया था।
नयी दिल्ली, 28 अप्रैल दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें दिल्ली संवाद एवं विकास आयोग (डीडीसीडी) के पूर्व उपाध्यक्ष जैस्मीन शाह को सरकारी आवास खाली करने के लिए कहा गया था।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह ने कहा कि जब शाह को डीडीसीडी उपाध्यक्ष के पद से हटाने को चुनौती देने वाली उनकी रिट याचिका पहले से ही अदालत में लंबित है, तो इस तरह का बेदखली आदेश अधिकारियों द्वारा पारित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि मामले की दो-तीन बार पहले ही सुनवाई हो चुकी है।
उन्होंने कहा, ‘‘...ऐसी परिस्थितियों में, याचिकाकर्ता (शाह) को सरकारी आवासीय परिसर खाली करने और उन्हें अनधिकृत काबिज के तौर पर मानने संबंधी निर्देश पर रोक रहेगी।’’
अदालत का आदेश शाह द्वारा दायर एक अर्जी पर आया, जिसमें प्राधिकारियों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि लोक निर्माण विभाग के विशेष सचिव द्वारा 25 अप्रैल को जारी किए गए आदेश के अनुसार उन्हें परिसर से बेदखल करने के लिए आगे कोई कदम नहीं उठाया जाए।
यह अर्जी शाह की उस लंबित याचिका में दायर की गई थी जिसमें दिल्ली सरकार के निदेशक (योजना) द्वारा 17 नवंबर, 2022 के जारी आदेश को चुनौती दी गई थी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से शाह को डीडीसीडी के उपाध्यक्ष के पद से हटाने के उपराज्यपाल द्वारा किए गए अनुरोध पर उक्त आदेश जारी गया था। साथ ही ऐसे निर्णय के लंबित रहने के दौरान उन्हें उनके कार्यालय स्थान का उपयोग करने से रोकने और उन्हें दिए गए कर्मचारियों और सुविधाओं को वापस लेने के लिए कहा गया था।
डीडीसीडी कार्यालयों को पिछले साल 17 नवंबर की रात "राजनीतिक लाभ के लिए शाह द्वारा कथित दुरुपयोग’’ को रोकने के लिए सील कर दिया गया था। सीलिंग की कवायद दिल्ली सरकार के योजना विभाग ने की थी।
याचिका में कहा गया है, ‘‘उक्त आदेश याचिकाकर्ता के पद को बिलकुल भी समाप्त नहीं करते या उन्हें उपाध्यक्ष के पद से नहीं हटाते। ऐसे मामले में, आवंटित सरकारी आवास से उन्हें बेदखल करने का आदेश पूरी तरह से समय से पहले और अधिकार क्षेत्र के बाहर है।’’
शाह का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा ने किया।
सुनवाई के दौरान उपराज्यपाल की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने कहा कि 25 अप्रैल का आदेश उपराज्यपाल ने जारी नहीं किया था और यह पीडब्ल्यूडी का आदेश था। उन्होंने कहा कि यह आदेश पिछले साल नवंबर में पारित मूल आदेश का अभिन्न अंग है, जिसके तहत इस मुद्दे को राष्ट्रपति के पास भेजा गया है।
जैन ने कहा, ‘‘यह सार्वजनिक परिसर अधिनियम के तहत एक सरकारी आवास है और घर सहित विशेषाधिकारों को वापस लेना आदेश का पहले से ही एक हिस्सा है।’’
न्यायाधीश ने कहा, "मुझे कहना होगा कि मैं इस अर्जी को देखकर बहुत हैरान हूं।"
मामला पहले से ही 24 मई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)