देश की खबरें | न्यायालय ने राष्ट्रीय न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पर राज्यों के जवाब नहीं मिलने पर हैरानी जतायी
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, चार नवंबर उच्चतम न्यायालय ने द्वितीय राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत न्यायिक अधिकारियों को वेतन और भत्ते में बढ़ोतरी से जुड़े एक मामले में 20 राज्यों द्वारा जवाब दाखिल नहीं करने पर ‘‘हैरानी’’ जतायी। न्यायालय ने कहा कि जवाब नहीं दाखिल किए जाने पर राज्यों के मुख्य सचिवों को पेश होना होगा।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल को भी नोटिस जारी किया । मामले में ‘न्याय मित्र’ पी एस नरसिम्हा ने कहा कि इस तरह के महत्वपूर्ण मामलों में शीर्ष विधि अधिकारी की जरूरत होगी, जिसके बाद वेणुगोपाल को नोटिस जारी किया गया।

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पीठ में न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमणियन भी थे। पीठ ने कहा, ‘‘हम हैरान हैं कि 20 राज्यों ने अब तक जवाब दाखिल नहीं किए हैं।’’

पीठ ने मामले को अधीनस्थ न्यायपालिका के लिए महत्वपूर्ण बताया और कहा कि अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं किया जा सकता। इसलिए जवाब दाखिल नहीं होने की स्थिति में मुख्य सचिवों को पेश होना होगा ।

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नरसिम्हा ने कहा कि राज्यों ने आयोग की 2020 रिपोर्ट पर जवाब दाखिल नहीं किए हैं। आयोग ने इस साल 29 जनवरी से न्यायिक अधिकारियों के वेतन और भत्ता में वृद्धि के संबंध में अपनी अंतिम रिपोर्ट दी थी।

शीर्ष अदालत ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी वी रेड्डी की अध्यक्षता वाले आयोग का कार्यकाल भी अगले साल 31 जनवरी तक के लिए बढ़ा दिया।

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