देश की खबरें | न्यायालय ने द्रमुक कार्यकर्ता हत्या मामले में सीबीआई जांच संबंधी याचिका पर डीजीपी से जवाब मांगा

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नयी दिल्ली, दो अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने एक महिला वकील की उस याचिका पर तमिलनाडु सरकार और राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से जवाब मांगा है जिसमें उन्होंने अपने पति की 2020 में हुई नृशंस हत्या की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने का आग्रह किया है।

याचिकाकर्ता टी. संध्या के पति के. राजकुमार द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के कार्यकर्ता और वकील भी थे तथा वह अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखते थे। पति-पत्नी दोनों तमिलनाडु के तिरुवरुर की अदालत में वकालत करते थे।

न्यायमूर्ति बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना की पीठ ने संध्या की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता के. सुब्रमण्यम की इन दलीलों का संज्ञान लिया कि मद्रास उच्च न्यायालय ने सीबीआई की जांच संबंधी उनकी मुवक्किल की याचिका खारिज करके त्रुटिपूर्ण निर्णय दिया है।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘नोटिस जारी किया जाए, जिसका जवाब चार सप्ताह के भीतर दिया जाए। नोटिस तामील करने के सामान्य तरीके के अलावा, सरकारी वकील के माध्यम से प्रतिवादियों को नोटिस तामील किया जाए। इसके अलावा दस्ती सेवा की भी अनुमति दी जाती है।’’

सुब्रमण्यम ने गत शुक्रवार को एक संक्षिप्त सुनवाई में कहा कि मृतक वकील अनुसूचित जाति से संबंधित थे और साथ ही वह द्रमुक से भी जुड़े थे। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय निकाय चुनाव में द्रमुक नेता के लिए प्रचार करने के बाद सशक्त पिछड़ा वर्ग समुदाय 'कल्लार' से संबंधित कुछ स्थानीय पुलिस अधिकारी उनके विरोधी हो गए थे।

उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय याचिका को खारिज करते समय इस तथ्य पर ध्यान देने में विफल रहा कि हत्या के मामले में विलंब से प्राथमिकी दर्ज करने वाली स्थानीय पुलिस ने उच्च न्यायालय द्वारा याचिका का संज्ञान लिए जाने के बाद जल्दबाजी में आरोपपत्र भी दाखिल कर दिया।

जान गंवाने वाले वकील ने जातिगत और राजनीतिक आधार पर कुछ स्थानीय पुलिसकर्मियों के साथ पुरानी दुश्मनी के आधार पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत एक स्थानीय अदालत में न्यायिक शिकायत दर्ज कराने के अलावा उच्च अधिकारियों को प्रतिवेदन भी भेजा था।

याचिका में कहा गया है कि कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा मामला वापस लेने की धमकी दिए जाने के बाद भी वकील ने शिकायत वापस लेने से इनकार कर दिया था।

याचिका के अनुसार, वकील की 12 अक्टूबर, 2020 की रात उस वक्त बेरहमी से हत्या कर दी गई थी, जब वह तिरुवरुर जिले में फसलों को पानी देने के लिए अपने खेतों पर गए थे।

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