देश की खबरें | न्यायालय ने मानव अंग प्रतिरोपण को लेकर याचिका पर केंद्र, स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशालय का जवाब मांगा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने मानव अंगों एवं उत्तकों को शरीर से निकालने, भंडारण और प्रतिरोपण की अनुमति केवल पंजीकृत मेडिकल संस्थानों को देने के संबंध में निर्देश जारी करने का अनुरोध करने वाली एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर केंद्र, स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशालय (डीजीएचएस) और राज्यों से शुक्रवार को जवाब मांगा।

नयी दिल्ली, दो फरवरी उच्चतम न्यायालय ने मानव अंगों एवं उत्तकों को शरीर से निकालने, भंडारण और प्रतिरोपण की अनुमति केवल पंजीकृत मेडिकल संस्थानों को देने के संबंध में निर्देश जारी करने का अनुरोध करने वाली एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर केंद्र, स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशालय (डीजीएचएस) और राज्यों से शुक्रवार को जवाब मांगा।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह की दलील पर गौर किया।

सिंह ने दलील दी कि यह सुनिश्चित करने की तत्काल आवश्यकता है कि सरकार या अर्द्ध-सरकारी मेडिकल संस्थान मानव अंगों एवं उत्तकों का प्रतिरोपण करने के लिए अवश्य ही राष्ट्रीय अंग एवं उत्तक प्रतिरोपण संगठन में पंजीकृत होने चाहिए।

वरिष्ठ वकील ने कहा कि अंगदान करने वाले जीवित व्यक्ति भारत में कई वर्षों से किडनी (प्रतिरोपण) के प्राथमिक स्रोत रहे हैं और प्रणाली में सुधार कर इस प्रवृत्ति को बदलने की जरूरत है।

सिंह ने ‘अंगदान और प्रतिरोपण’ पर चंडीगढ़ स्थित स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) के पूर्व निदेशक डॉ वाई.के. चावला की अध्यक्षता वाले कार्यबल की रिपोर्ट में की गई सिफारिशें लागू करने के लिए भी निर्देश देने का अनुरोध किया।

मध्यप्रदेश के संगठन ‘गवेषणा: मानवोत्थान पर्यावरण एवं स्वास्थ्य जागरूकता समिति’ द्वारा दायर जनहित याचिका में केंद्र और डीजीएचएस के अलावा राष्ट्रीय अंग एवं उत्तक प्रतिरोपण संगठन तथा सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया गया है।

अधिवक्ता वरूण ठाकुर के मार्फत दायर जनहित याचिका में यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया कि सरकार या अर्द्ध-सरकारी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पतालों को मानव अंग प्रतिरोपण (संशोधन) अधिनियम,2011 की धारा 14 और 14-ए के तहत जरूरतों को पूरा करने का निर्देश दिया जाए।

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