देश की खबरें | न्यायालय ने मद्यनिषेध कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बिहार सरकार से तीन हफ्तों में जवाब मांगा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने बिहार के कठोर मद्यनिषेध कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सोमवार को राज्य सरकार को तीन हफ्तों के अंदर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

नयी दिल्ली, 14 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने बिहार के कठोर मद्यनिषेध कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सोमवार को राज्य सरकार को तीन हफ्तों के अंदर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

साथ ही, इसी तरह की याचिकाओं को पटना उच्च न्यायालय से खुद के पास हस्तांतरित करने का आदेश भी दिया।

न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति सी. टी. रविकुमार की सदस्यता वाली पीठ ने कहा, ‘‘चूंकि इस न्यायालय के समकक्ष समान मुद्दे विचारार्थ लंबित हैं, इसलिए यह उपयुक्त होगा कि उच्च न्यायालय में दायर अन्य रिट याचिकाएं यहां हस्तांतरित कर दी जाएं और यहां (शीर्ष न्यायालय में) लंबित विशेष अनुमति याचिका के साथ उनकी सुनवाई की जाए।’’

पीठ इस मुद्दे पर तीन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिसमें एक याचिका इंटरनेशनल स्पिरिट एंड वाइन्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने दायर की है।

शीर्ष न्यायालय ने कहा कि सभी याचिकाओं में बिहार मद्य निषेध एवं आबकारी अधिनियम,2016 की वैधता से संबद्ध मुद्दे हैं। पीठ ने राज्य सरकार से तीन हफ्तों के अंदर जवाब दाखिल करने को कहा और मामलों की सुनवाई अप्रैल के प्रथम सप्ताह के लिए निर्धारित कर दी। राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार कर रहे हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘यह सब अधिनियम की वैधता के बारे में है। जवाब पटना उच्च न्यायालय में दाखिल किया गया और अब इसे बेहतर नहीं किया जा सकता। आप अपना हलफनामा दाखिल करें। समान बहस, समान हलफनामा और समान सामग्री सभी मामलों में प्रासंगिक होंगे क्योंकि उन सभी में (अधिनियम की) वैधता को चुनौती दी गई है। ’’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\