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न्यायालय ने डाक्टरों के अस्पतालों के निकट पृथकवास के बारे में केन्द्र से जानकारी मांगी

इस मामले में याचिकाकर्ता डा आरूषि जैन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि सरकारी अस्पतालों के रेजीडेन्ट डाक्टरों को सात से 14 दिन की ड्यूटी करने के बाद पृथकवास किया जाना चाहिए। लेकिन इन चिकित्सकों को उन स्थानों पर पृथकवास कराया जा रहा है जहां उन्हें कमरे, बाथरूम साझा करने पड़ रहे हैं जबकि व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें सामाजिक दूरी बनी रहे।

न्यायालय ने डाक्टरों के अस्पतालों के निकट पृथकवास के बारे में केन्द्र से जानकारी मांगी
जमात

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूति बी आर गवई की पीठ ने इस मामले की वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से सुनवाई के दौरान केन्द्र को यह निर्देश दिया। पीठ ने केन्द्र की ओर से पेश सालिसीटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह इस बारे में जानकारी प्राप्त करके अगले सप्ताह उसे अवगत करायें।

इस मामले में याचिकाकर्ता डा आरूषि जैन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि सरकारी अस्पतालों के रेजीडेन्ट डाक्टरों को सात से 14 दिन की ड्यूटी करने के बाद पृथकवास किया जाना चाहिए। लेकिन इन चिकित्सकों को उन स्थानों पर पृथकवास कराया जा रहा है जहां उन्हें कमरे, बाथरूम साझा करने पड़ रहे हैं जबकि व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें सामाजिक दूरी बनी रहे।

रोहतगी ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था पृथकवास के मकसद को ही विफल करेगी और कोरोना योद्धा बीमार पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ यह चाहते हैं कि कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ अग्रिम पंक्ति में मौजूद इन स्वास्थ्यकर्मियों को अस्पतालों के नजदीक आवश्यक सुविधायें उपलब्ध करायी जायें।

उन्होंने कहा कि डाक्टरों के लिये भी एक निर्धारित मानक प्रक्रिया का पालन होना चाहिए क्योंकि ये अपने घरों से अस्पताल पहुंचने में अनेक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। आवास सोसायटियों में भी उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सालिसीटर जनरल ने कहा कि इन डाक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिये केन्द्र ने सभी राज्य सरकारों को पर्याप्त संख्या में होटल और अतिथि गृहों की व्यवस्था करने के लिये निर्देश जारी किये हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं लेकिन अगर कहीं कोई विसंगति है तो उसमें सुधार के लिये उसे प्राधिकारियों के संज्ञान में लाया जा सकता है।

मेहता ने कहा कि सरकार इन कोरोना योद्धाओं की संरक्षा के लिये सभी आवश्यक कदम उठा रही है और इस बारे मे निर्देश दिये गये हैं। चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों पर किसी भी प्रकार के हमले या उन्हें मकान अथवा आवासीय सोसायटी के फ्लैट खाली करने के लिये कहने को गैर जमानती अपराध बनाया गया है ।

पीठ ने मेहता से कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा अस्पतालों के निकट ही पृथकवास के लिये आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के बारे में दिये गये सुझाव पर विचार किया जाये। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कुछ सुझाव विचाराधीन हैं और यह इनमें से एक है।

रोहतगी ने इसमें हस्तक्षेप करते हुये कहा कि सालिसीटर जनरल जो कह रहे हैं वह बहुत कम है लेकिन उन्हें यह बताना चाहिए कि कितने होटल और आवास उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि डाक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिये हेल्पलाइन होनी चाहिए ताकि वे अपनी किसी भी समस्या के बारे में प्राधिकारियों को अवगत करा सकें।

पीठ ने मेहता से कहा कि वह इस मामले में अब अगले सप्ताह विचार करेगी और उस समय तक उन्हें अस्पतालों के नजदीक ही डाक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के पृथकवास की सुविधाओं के बारे में आवश्यक निर्देश प्राप्त कर लेने चाहिए।

शीर्ष अदालत ने आठ अप्रैल को इस मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की थी कि कोविड-19 महामारी के दौरान मरीजों का इलाज कर रहे डाक्टर और स्वास्थ्यकर्मी इस युद्ध में पहली पंक्ति के योद्धा हैं और सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके लिये जरूरी वैयक्तिक सुरक्षा उपकरण (पीपीई) उपलब्ध रहें।

अनूप

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(The above story first appeared on LatestLY on May 15, 2020 01:59 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).