देश की खबरें | न्यायालय ने कॉलेजियम प्रस्तावों को अधिसूचित करने संबंधी याचिका पर अटॉर्नी जनरल से सहायता मांगी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने एक याचिका पर फैसला करने में अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी की सहायता मांगी है, जिसमें यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि शीर्ष अदालत कॉलेजियम की ओर से अनुशंसित न्यायाधीशों की नियुक्ति को अधिसूचित करने के संबंध में केंद्र के लिए एक समय सीमा तय की जाए।
नयी दिल्ली, 19 अगस्त उच्चतम न्यायालय ने एक याचिका पर फैसला करने में अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी की सहायता मांगी है, जिसमें यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि शीर्ष अदालत कॉलेजियम की ओर से अनुशंसित न्यायाधीशों की नियुक्ति को अधिसूचित करने के संबंध में केंद्र के लिए एक समय सीमा तय की जाए।
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई की। पीठ ने कहा, ‘‘याचिका की एक प्रति अटॉर्नी जनरल के कार्यालय को भेजी जाए। हम अटॉर्नी जनरल से न्यायालय की सहायता करने का आग्रह करते हैं।’’
पीठ ने मामले की सुनवाई आठ सितंबर के लिए निर्धारित की है। शीर्ष अदालत वकील हर्ष विभोरे सिंघल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है।
याचिका में कहा गया, ‘‘यह रिट याचिका किसी भी तरह से न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम प्रणाली को चुनौती नहीं देती है। बल्कि, यह अधिक न्यायिक स्वतंत्रता के लिए कॉलेजियम को और एकजुट तथा मजबूत करने का प्रयास करती है।’’
याचिका में उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर कॉलेजियम की सिफारिशों को अधिसूचित करने के लिए समय नहीं होने की अपरिभाषित स्थिति को खत्म करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
याचिका में कहा गया है कि निश्चित समय सीमा के अभाव में सरकार नियुक्तियों को अधिसूचित करने में मनमाने ढंग से देरी करती है, जिससे न्यायिक स्वतंत्रता प्रभावित होती है, संवैधानिक और लोकतांत्रिक आदेश खतरे में पड़ जाता है तथा अदालत की कार्यवाही पर असर पड़ता है।
याचिका में कहा गया कि न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके नियुक्तियों को अधिसूचित करने के लिए कॉलेजियम की किसी भी सिफारिश पर आपत्ति जताने के लिए एक निश्चित समय अवधि तय करे।
संविधान का अनुच्छेद 142 शीर्ष अदालत के समक्ष लंबित किसी भी मामले में ‘‘पूर्ण न्याय’’ करने के लिए उसके आदेशों को लागू करने से संबंधित है। अनुच्छेद 142(1) के अनुसार, उच्चतम न्यायालय द्वारा दिया गया आदेश भारत के पूरे क्षेत्र में निष्पादन योग्य है।
याचिका में कहा गया है कि यदि किसी नाम पर आपत्ति नहीं की जाती है या ऐसी निर्धारित समय अवधि के अंत तक नियुक्तियों को अधिसूचित नहीं किया जाता है, तो ऐसे न्यायाधीशों की नियुक्तियों को अधिसूचित माना जाना चाहिए।
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