उच्चतम न्यायालय ने NEET-PG को स्थगित करने संबंधी याचिका खारिज की

उच्चतम न्यायालय ने 11 अगस्त को होने वाली नीट-पीजी परीक्षा को स्थगित करने की मांग से संबंधित याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी. इसमें दावा किया गया था कि अभ्यर्थियों को ऐसे शहर आवंटित किए गए हैं, जहां पहुंचना उनके लिए बेहद असुविधाजनक है.

नयी दिल्ली, 9 अगस्त : उच्चतम न्यायालय ने 11 अगस्त को होने वाली नीट-पीजी परीक्षा को स्थगित करने की मांग से संबंधित याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी. इसमें दावा किया गया था कि अभ्यर्थियों को ऐसे शहर आवंटित किए गए हैं, जहां पहुंचना उनके लिए बेहद असुविधाजनक है. प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला तथा न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि वह पांच छात्रों के लिए दो लाख छात्रों के करियर को खतरे में नहीं डाल सकते.

पीठ ने कहा, ‘‘हम ऐसी परीक्षा को कैसे स्थगित कर सकते हैं. श्री संजय हेगड़े, आजकल लोग बस परीक्षा स्थगित करने के लिए कहते हैं. यह एक आदर्श दुनिया नहीं है. हम अकादमिक विशेषज्ञ नहीं हैं.’’ याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने कहा कि राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (स्नातकोत्तर) (नीट-पीजी) को पुनर्निर्धारित करने की आवश्यकता है, क्योंकि एक परीक्षा सुबह और एक दोपहर बाद होनी है. यह भी पढ़ें : आरएसएस ने बांग्लादेश में हिन्दुओं व अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया

याचिका में कहा गया कि अनेक अभ्यर्थियों को ऐसे शहर आवंटित किए गए हैं, जहां पहुंचना उनके लिए बेहद असुविधाजनक है. इसमें कहा गया कि परीक्षा संबंधी शहर 31 जुलाई को आवंटित किए गए थे और विशिष्ट केंद्र आठ अगस्त को घोषित किए जाएंगे. यह परीक्षा पहले 23 जून को आयोजित होनी थी. कुछ अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मद्देनजर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे ‘‘एहतियाती उपाय’’ के रूप में स्थगित कर दिया था.

Share Now

संबंधित खबरें

Supreme Court on Abetment to Suicide: लिव-इन पार्टनर से शादी से इनकार आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं; सुप्रीम कोर्ट ने छह आरोपियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही की रद्द

‘अपराधियों में ऐसा खौफ पैदा करें कि दोबारा सोचने की हिम्मत न हो’: दिल्ली में दुष्कर्म की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट की पुलिस को सख्त हिदायत

'यह संविधान के मूल पर सीधा प्रहार है': मताधिकार छीनने पर बोले सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां; 'बिना नोटिस और सुनवाई के वोटर लिस्ट से नाम नहीं कट सकता'

Social Media Ban for Minors: क्या भारत में 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर लगेगा बैन? सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने दिए कड़े नियमों के संकेत