देश की खबरें | अदालत ने पूर्व मंत्री योगेन्द्र साव की जमानत याचिका खारिज की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. झारखंड उच्च न्यायालय से पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता योगेंद्र साव को बृहस्पतिवार को कोई राहत नहीं मिली और अदालत ने बड़कागांव एनटीपीसी भूमि अधिग्रहण मामले में हुई हिंसा से जुड़े मुकदमे में साव की जमानत याचिका खारिज कर दी।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

रांची, तीन दिसंबर झारखंड उच्च न्यायालय से पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता योगेंद्र साव को बृहस्पतिवार को कोई राहत नहीं मिली और अदालत ने बड़कागांव एनटीपीसी भूमि अधिग्रहण मामले में हुई हिंसा से जुड़े मुकदमे में साव की जमानत याचिका खारिज कर दी।

न्यायमूर्ति आर मुखोपाध्याय की पीठ ने जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया।

यह भी पढ़े | Chhattisgarh: बघेल सरकार की किसान हितेषी नीतियों का दिख रहा है असर, MSP पर उपज बेचने वालों की संख्या 94 प्रतिशत से ज्यादा.

अदालत ने कहा कि इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय में साव की जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। ऐसे में उच्च न्यायालय उन्हें जमानत नहीं दे सकता है।

राज्य के पूर्व कृषि मंत्री योगेंद्र साव ने बड़कागांव में एनटीपीसी के लिए जमीन अधिग्रहण का विरोध किया था। इस दौरान पुलिस व ग्रामीणों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय से जमानत खारिज होने के बाद उन्होंने उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल की थी।

यह भी पढ़े | एचसीएल टैक्नोलॉजीज की चेयरपर्सन Roshni Nadar Malhotra बनीं देश की सबसे अमीर महिला.

सुनवाई के दौरान योगेंद्र साव के अधिवक्ता ने पीठ को बताया कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने वाले ने अपनी गवाही में कहा है कि योगेंद्र साव घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। साथ ही इस मामले में योगेंद्र साव लगभग तीन साल से जेल में बंद हैं। ऐसे में उन्हें जमानत मिलनी चाहिए।

लेकिन पीठ ने सर्वोच्च न्यायालय से उनकी जमानत याचिका खारिज होने का हवाला देते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी।

सं इन्दु

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\