देश की खबरें | न्यायालय ने झारखंड के पूर्व मंत्री योगेन्द्र साओ की जमानत याचिका खारिज की

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नयी दिल्ली, 12 जून उच्चतम न्यायालय ने झारखण्ड में 2016 में दंगा करने और हिंसा से संबंधित मामले में राज्य के पूर्व मंत्री योगेन्द्र साओ की जमानत याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। इस घटना में अनेक लोग जख्मी हो गये थे।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्स के माध्यम से मामले की सुनवाई करते हुये साओ की जमानत याचिका खारिज की।

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साओ ने झारखण्ड उच्च न्यायालय के 20 मई के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। इस आदेश के तहत अदालत ने जमानत याचिका खारिज करते हुये कहा था कि मामले की प्राथमिकता से पता चलता है कि उन्होंने अपनी तत्कालीन विधायक पत्नी निर्मला देवी के साथ मिलकर एनटीपीसी की खनन गतिविधियों में बाधा डाली थी और इस वजह से अनेक लोग जख्मी हो गये थे।

उच्च न्यायालय ने जमानत रद्द करने संबंधी अपने आदेश में इस तथ्य का भी जिक्र किया था कि साओ ने उच्चतम न्यायालय द्वारा 15 दिसंबर, 2017 को जमानत देते समय लगायी गयी शर्तो का उल्लंघन किया था ।

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शीर्ष अदालत ने साओ द्वारा जमानत की शर्तो का उल्लंघन किये जाने के कारण पिछले साल 12 अप्रैल को उन्हें रांची की अदालत में समर्पण करने का आदेश दिया था।

झारखण्ड में 2013 में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार में साओ मंत्री थे। साओ दंगा करने ओर हिंसा के लिये भड़काने के एक दर्जन से ज्यादा मामलों में आरोपी हैं।

शीर्ष अदालत ने साओ और उनकी पत्नी को 15 दिसंबर, 2017 को जमानत देते हुये दोनों को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रहने का निर्देश दिया था। इन दोनों को अपने मामले की सुनवाई के लिये ही पुलिस संरक्षण में झारखंड आने की इजाजत थी लेकिन ऐसा करने से पहले उन्हें भोपाल के पुलिस अधीक्षक को सूचित करना जरूरी था।

न्यायालय ने साओ और उनकी पत्नी के खिलाफ लंबित 18 मुकदमे रांची की अदालत से हजारीबाग स्थानांतरित कर दिये थे। हालांकि न्यायालय ने निर्मला देवी को भोपाल के बजाये पटना में रहने की अनुमति देने से इंकार कर दिया था।

झारखंड सरकार ने अपने वकील तपेश कुमार सिंह के माध्यम से शीर्ष अदालत को सूचित किया था कि 15 दिसंबर, 2017 को जमानत मिलने के बाद 253 दिन में से साओ सिर्फ 25 दिन ही भोपाल में रहे और कई बार वह स्थानीय प्रशासन को सूचित किये बगैर ही भोपाल से बाहर चले गये थे।

अनूप

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