देश की खबरें | अदालत ने ऋण धोखाधड़ी मामले में जमानत अर्जी खारिज की, कहा-अपराध से जन विश्वास को आघात पहुंचा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. यहां की एक अदालत ने कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी से संबंधित मामले में एक व्यक्ति को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि इस तरह की ‘बेईमानी वाले कृत्य’ से लोगों का विश्वास प्रभावित होता है और अर्थव्यवस्था की नींव कमजोर होती है।
नयी दिल्ली, 16 जुलाई यहां की एक अदालत ने कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी से संबंधित मामले में एक व्यक्ति को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि इस तरह की ‘बेईमानी वाले कृत्य’ से लोगों का विश्वास प्रभावित होता है और अर्थव्यवस्था की नींव कमजोर होती है।
विशेष न्यायाधीश नीलोफर आबिदा परवीन ने भरत राणा चौधरी की जमानत याचिका खारिज करते हुए अपराध के तरीके को ‘भयावह’ करार दिया। अदालत ने कहा कि वह ‘प्रथम दृष्टया’ सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर रहे थे और झूठे सबूत गढ़ रहे थे।
धनशोधन मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दावा किया कि 2010 से 2012 के दौरान ऋण पुनर्भुगतान में चूक कर चौधरी ने पंजाब नेशनल बैंक को लगभग 30 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया।
न्यायाधीश ने कहा ‘‘आरोप बेहद गंभीर हैं, यह अपराध न केवल बड़े स्तर के दृष्टिकोण से, बल्कि अपराध की परिपाटी के स्तर पर भी गंभीर और भयावह है। आरोपी जालसाजी कर बैंक को कई बार धोखा देने में सफल रहे जिससे सार्वजनिक धन की बड़ी हानि हुई...।’’
आरोपी ने इस आधार पर जमानत मांगी थी कि मामला 2015 में दर्ज किया गया था और उसे 14 फरवरी, 2023 को ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया था।
ईडी के अनुसार, चौधरी ने दूसरे लोगों की मदद से झूठी, जाली और मनगढ़ंत मूल्यवान प्रतिभूतियों, फर्जी पहचान दस्तावेजों, जाली किराया करार , जाली गिरवी संपत्ति दस्तावेज, फर्जी बहीखातों और अन्य दस्तावेजों के आधार पर पंजाब नेशनल बैंक से ऋण लिया जिसकी वजह से बैंक को करीब 30 करोड़ रुपये की हानि हुई।
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