देश की खबरें | न्यायालय ने दिल्ली में सेवाओं के नियंत्रण से संबंधित केंद्र के अध्यादेश पर रोक लगाने से इनकार किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली में सेवाओं पर नियंत्रण संबंधी केंद्र के हालिया अध्यादेश पर अंतरिम रोक लगाने से सोमवार को इनकार कर दिया। हालांकि, अरविंद केजरीवाल नीत सरकार द्वारा नियुक्त 437 स्वतंत्र सलाहकारों को बर्खास्त करने के उपराज्यपाल के फैसले पर आम आदमी पार्टी (आप) नीत सरकार की दलीलों पर विचार करने पर न्यायालय सहमत हो गया।

नयी दिल्ली, 10 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली में सेवाओं पर नियंत्रण संबंधी केंद्र के हालिया अध्यादेश पर अंतरिम रोक लगाने से सोमवार को इनकार कर दिया। हालांकि, अरविंद केजरीवाल नीत सरकार द्वारा नियुक्त 437 स्वतंत्र सलाहकारों को बर्खास्त करने के उपराज्यपाल के फैसले पर आम आदमी पार्टी (आप) नीत सरकार की दलीलों पर विचार करने पर न्यायालय सहमत हो गया।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) अध्यादेश, 2023 को चुनौती देने वाली दिल्ली सरकार की याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी करते हुए प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने आप नीत सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी से अपनी याचिका में संशोधन करने और उपराज्यपाल को मामले में एक पक्ष के रूप में शामिल करने को कहा।

पीठ ने मामले की सुनवाई 17 जुलाई को निर्धारित करते हुए कहा, ‘‘यह एक अध्यादेश है। हमें मामले की सुनवाई करनी होगी।’’ सुनवाई की शुरुआत में सिंघवी ने रोक लगाने का अनुरोध करते हुए कहा कि अध्यादेश ने निर्वाचित प्रतिनिधियों की शक्तियों को छीन लिया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा नियुक्त 437 स्वतंत्र सलाहकारों को उपराज्यपाल ने हटा दिया है।

सिंघवी ने अध्यादेश को चुनौती देते हुए कहा, ‘‘अध्यादेश को तो छोड़ दें, ऐसे कई उदाहरण हैं जहां उच्चतम न्यायालय ने संसद के कानून पर रोक लगा दी है..क्या आप ऐसी बैठक की कल्पना कर सकते हैं जहां एक मुख्यमंत्री अल्पमत में बैठता है और दो नौकरशाह कहते हैं कि हम प्रथम दृष्टया इस प्रस्ताव को गैरकानूनी मानते हैं। सबसे पहले, वे दोनों मुख्यमंत्री को नजरअंदाज कर देंगे। फिर वे इसे उपराज्यपाल के पास भेजेंगे जो ‘सुपर सीएम’ हैं।’’

आप नीत सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि यह अध्यादेश शीर्ष अदालत और संविधान की मूल संरचना को दरकिनार करने का प्रयास करता है। दिल्ली सरकार ने अध्यादेश को रद्द करने के साथ ही इस पर अंतरिम रोक लगाने का भी अनुरोध किया है।

केंद्र ने 19 मई को दिल्ली में ग्रुप-ए अधिकारियों के स्थानांतरण और पदस्थापन को लेकर एक प्राधिकरण बनाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) अध्यादेश, 2023 लागू किया था। आप नीत सरकार ने अध्यादेश को सेवाओं पर नियंत्रण के संबंध में उच्चतम न्यायालय के फैसले के साथ ‘‘धोखा’’ करार दिया है।

अध्यादेश के एक सप्ताह पहले न्यायालय ने दिल्ली में पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि को छोड़कर सेवाओं का नियंत्रण निर्वाचित सरकार को सौंपने का आदेश दिया था।

अध्यादेश में दिल्ली, अंडमान और निकोबार, लक्षद्वीप, दमन और दीव एवं दादरा और नगर हवेली (सिविल) सेवा (दानिक्स) कैडर के ग्रुप-ए के अधिकारियों के तबादले और अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण की स्थापना का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री प्राधिकरण के तीन सदस्यों में से एक हैं, जबकि दो अन्य नौकरशाह हैं। प्राधिकरण द्वारा निर्णय बहुमत से लिए जाएंगे और विवाद की स्थिति में मामला उपराज्यपाल के पास भेजा जाएगा जिनका निर्णय अंतिम होगा।

केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ‘‘कुछ चौंकाने वाले तथ्य’’ हैं। मेहता ने कहा, ‘‘हटाए गए लोगों में से एक मौजूदा विधायक की पत्नी हैं। ऐसे कई पार्टी कार्यकर्ता हैं जिन्हें उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना नियुक्त किया गया था। मुझे इसे रिकॉर्ड पर रखना होगा।’’ उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित व्यक्ति हमेशा उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now