देश की खबरें | न्यायालय का सीबीआई के पुलिस उपाधीक्षक बस्सी के तबादले के मामले में दखल देने से इंकार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने केन्द्रीय जांच ब्यूरो में पुलिस उपाधीक्षक ए के बस्सी का तबादला पोर्ट ब्लेयर किये जाने के मामले में मंगलवार को हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। बस्सी जांच ब्यूरो में पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले की जांच कर रहे थे और उनका कहना था कि इस तबादले से यह जांच प्रभावित होगी।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 28 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने केन्द्रीय जांच ब्यूरो में पुलिस उपाधीक्षक ए के बस्सी का तबादला पोर्ट ब्लेयर किये जाने के मामले में मंगलवार को हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। बस्सी जांच ब्यूरो में पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले की जांच कर रहे थे और उनका कहना था कि इस तबादले से यह जांच प्रभावित होगी।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने बस्सी से सवाल किया कि तबादले के आदेश के अनुसार वह पोर्ट ब्लेयर क्यों नहीं गये?

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पीठ ने अपने आदेश में कहा कि बस्सी इस तबादले के खिलाफ राहत के लिये उचित मंच में जा सकते हैं। पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी क्योंकि इसे वापस ले लिया गया।

इससे पहले, पीठ ने बस्सी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन से पूछा, ‘‘क्या यह सही है कि आपने अभी तक अंडमान और निकोबार में अपना पदभार ग्रहण नहीं किया है?’’

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धवन ने जवाब दिया कि गलत तरीके से उनके तबादले का आदेश दिया गया था और शीर्ष अदालत ने पिछले साल आठ जनवरी को उन्हें अपने तबादले के आदेश के बारे में प्रतिवेदन देने की छूट प्रदान की थी।

उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत के आदेश के बाद उनका तबादला आदेश नौ जनवरी, 2019 को वापस ले लिया गया था लेकिन एक दिन बाद ही जांच एजेन्सी के नये निदेशक आये और उन्होंने 11 जनवरी को फिर तबादले का आदेश दे दिया।

धवन ने कहा, ‘‘तबादला आदेश वापस लेने के बाद यह मामला यहीं खत्म हो जाना चाहिए था। लेकिन 10 जनवरी, 2019 को सीबीआई के नये निदेशक आये और कहा, ‘‘मैं घोषणा करता हूं कि नौ जनवरी, 2019 का आदेश अस्तित्व में नहीं है और तबादला आदेश बहाल कर दिया।’’

पीठ ने कहा कि अगर बस्सी सोचते हैं कि तबादले का आदेश गैरकानूनी या गलत था तो भी उन्हें पालन करते हुये पोर्ट ब्लेयर में अपना पदभार ग्रहण करना चाहिए, न्यायालय इसे निरस्त कर दे तो अलग बात है।

धवन ने कहा कि न्यायालय ने उन्हें अपना प्रतिवेदन देने की अनुमति प्रदान की थी ।

पीठ ने आठ जनवरी, 2019 के आदेश के अवलोकन के बाद कहा कि इस आदेश में भी उन्हें किसी प्रकार का संरक्षण प्राप्त नहीं है।

धवन ने कहा कि तबादले का आदेश ही न्यायालय के आदेश का सार है और बस्सी को आरोप पत्र के खिलाफ संरक्षण प्रदान करने की आवश्यकता है।

सीबीआई की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि बस्सी अपने तबादले के आदेश को उचित मंच के समक्ष चुनौती दे सकते हैं।

धवन ने कहा कि वह कैट में जायेंगे लेकिन आरोप पत्र से उन्हें संरक्षण प्रदान किया जाये क्योंकि उसमें यह सवाल किया गया है कि जांच एजेन्सी से अनुमति के बगैर ही वह तबादले के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत क्यों गये।

पीठ ने बस्सी को किसी भी प्रकार की राहत देने से इंकार कर दिया और उन्हें अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।

अनूप

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