देश की खबरें | न्यायालय ने केरल में हाथियों के गलियारों की सुरक्षा से जुड़ी याचिका पर विचार करने से इनकार किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने हाथियों और मनुष्य के बीच संघर्ष को कम करने के लक्ष्य के साथ केरल में हाथियों के गलियारों को राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर उनका संरक्षण करने तथा चावल खाने वाले हाथी ‘अरिक्कोम्बन’ को चिन्नाकनाल में उसके प्राकृतिक आवास वापस भेजने की मांग वाली जनहित याचिकाओं पर विचार करने से बुधवार को इनकार कर दिया।
नयी दिल्ली, पांच जुलाई उच्चतम न्यायालय ने हाथियों और मनुष्य के बीच संघर्ष को कम करने के लक्ष्य के साथ केरल में हाथियों के गलियारों को राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर उनका संरक्षण करने तथा चावल खाने वाले हाथी ‘अरिक्कोम्बन’ को चिन्नाकनाल में उसके प्राकृतिक आवास वापस भेजने की मांग वाली जनहित याचिकाओं पर विचार करने से बुधवार को इनकार कर दिया।
चावल खाने वाला हाथी ‘अरिक्कोम्बन’ के स्थानांतरण को लेकर उच्च न्यायालय में विभिन्न याचिकाएं दायर की गयी हैं।
हाल ही में तमिलनाडु में इस हाथी को बेहोश करके पकड़ा गया और राज्य के जंगली इलाके में छोड़ा गया।
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति धनंजय वाई चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने जनहित याचिका दायर करने वालों की ओर से पेश वकील प्रियंका प्रकाश की दलीलें सुनी और उनसे केरल उच्च न्यायालय जाने या अन्य कानूनी उपाय अपनाने को कहा।
पीठ ने कहा, ‘‘केरल उच्च न्यायालय इस मुद्दे से निपट रहा है। बहुत सारी याचिकाएं लंबित हैं और आप उनमें से किसी में भी हस्तक्षेप कर सकती हैं।’’
सीआर नीलांकंदन सहित जनहित याचिका दायर करने वाले अन्य लोगों की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि ‘अरिक्कोम्बन’ का गलत सूचना के आधार पर स्थानांतरण हुआ है और तमिलनाडु सरकार ने इसपर 80 लाख रुपये खर्च किए हैं।
पीठ ने कहा, ‘‘यही समस्या है। ये जनहित याचिकाएं निजी हित से प्रभावित हैं और खास तौर से अरिक्कोम्बन हाथी के स्थानांतरण से प्रभावित व्यक्ति के कहने पर दायर की गई हैं। हम इसमें हस्तक्षेप के इच्छुक नहीं हैं क्योंकि वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हैं।’’
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