नयी दिल्ली, सात जुलाई राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आस पास के इलाकों में चल रहे अवैध बूचड़खाने पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाली याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह कह कर बृहस्पतिवार को विचार करने से इंकार कर दिया कि याचिकाकर्ता ने इसमें से किसी के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी है ।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा एवं न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा, ‘‘आपने एक भी अवैध बूचड़खाने का उदाहरण नहीं दिया है । आप चाहते हैं कि हम अटकलबाजी के आधार पर पूरी दिल्ली में जांच कराते रहे । बूचड़खानों की सूची कहां है ?’’
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि इस तरह के बूचड़खानों की वास्तविक संख्या की जानकारी संभव नहीं है क्योंकि पत्येक स्थानीय बाजार में इस तरह के अवैध बूचड़खाने का संचालन हो रहा है।
मामले में जिरह के बाद अधिवक्ता ने याचिका को वापस लेने तथा अवैध बूचड़खाने के बारे में आवश्यक जानकारी के साथ ताजा याचिका दायर करने की अनुमति मांगी ।
अदालत ने कहा कि याचिका खारिज की जाती है क्योंकि इसे वापस ले लिया गया है ।
याचिकाकर्ता दीपक उपाध्याय ने अधिवक्ताओं गौतम झा, पंकज कुमार और श्वेता झा के माध्यम से याचिका दायर कर दिल्ली एनसीआर में चल रहे अवैध बूचड़खानों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी ।
यचिका में कहा गया है कि “यह मुद्दा अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि हम लोग कोविड के दौर में रह रहे हैं और इस प्रकार की महामारियों के प्रसार की रोकथाम के लिए बाजार में बेचे जा रहे मांस की गुणवत्ता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण कारकों में से एक है।
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