न्यायालय ने सजा माफी की नीति पर हरियाणा सरकार से सवाल किया, दो सप्ताह में मांगा जवाब

शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से दो सप्ताह के भीतर यह जवाब मांगा है कि क्या यह नीति संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत बनायी जा सकती है, क्योंकि न्यायालय को लगता है कि यह नीति आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 433-ए के विपरीत है।

जमात

नयी दिल्ली, 10 मई उच्चतम न्यायालय ने उम्र कैद की सजा काट रहे 75 वर्ष या उससे ज्यादा आयु के कैदियों की सजा माफी संबंधी हरियाणा सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कानून के प्रावधानों के ‘विपरीत’ है।

शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से दो सप्ताह के भीतर यह जवाब मांगा है कि क्या यह नीति संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत बनायी जा सकती है, क्योंकि न्यायालय को लगता है कि यह नीति आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 433-ए के विपरीत है।

संविधान के अनुच्छेद 161 में जहां राज्यपाल को कुछ मामलों में सजा निलंबित करने, उसे माफ करने या उसमें बदलाव करने का अधिकार दिया गया है वहीं सीआरपीसी की धारा 433-ए में कुछ मामलों में राज्यपाल के इन अधिकारों पर पाबंदियां लगायी गयी हैं।

सीआरपीसी की धारा 433-ए यह भी कहती है कि दोषी जेल से तब तक रिहा नहीं किया जा सकता, जब तक उसने कम से कम 14 साल की सजा पूरी ना कर ली हो, यह प्रावधान उन कैदियो पर लागू होता है जिन्हें ऐसे मामलों में उम्रकैद की सजा दी गई है जिनमें अधिकतम मृत्युदंड का प्रावधान है या फिर जिसकी सजा मृत्युदंड से परिवर्रित होकर उम्रकैद बनी है।

न्यायमूर्ति यू. यू. ललित और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की पीठ एक आपराधिक मामले में अपील पर सुनवाई कर रही थी, उसी दौरान यह मामला सामने आया। इस दौरान पीठ को सूचित किया गया कि हरियाणा के राज्यपाल ने 15 अगस्त 2019 को सजा काट रहे कुछ कैदियों की सजा माफ की है।

नीति के अनुसार, यह विशेष सजा माफी सिर्फ उन्हें मिल सकती है जिनकी आयु 75वर्ष या उससे ज्यादा है और उन्हें उम्रकैद की सजा दी गई है तथा वे अपनी सजा के आठ साल पूरे कर चुके हैं।

पीठ ने अपने आठ मई के आदेश में कहा, ‘‘उक्त नीति के प्रावधानों के तहत, ऐसे दोषी जिन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई गई है और जिनकी उम्र 75 साल या उससे ज्यादा है (पुरुष दोषियों के संदर्भ में) और जिन्होंने अपनी वास्तविक सजा के आठ साल पूरे कर लिए हों, वे सजा माफी का लाभ लेने के हकदार हैं।’’

पीठ ने कहा, ‘‘पहली नजर में उक्त नीति सीआरपीसी, 1973 की धारा 433-ए के विपरीत लगती है।’’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, लेटेस्टली स्टाफ ने इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया है)

Share Now

संबंधित खबरें

RCB vs KKR, IPL 2026 57th Match Scorecard: रायपुर में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने कोलकाता को 6 विकेट से रौंदा, विराट कोहली ने खेली आतिशी पारी; यहां देखें मैच का स्कोरकार्ड

PBKS vs MI, IPL 2026 58th Match Date And Time: कब और कितने बजे से खेला जाएगा पंजाब किंग्स बनाम मुंबई इंडियंस के बीच रोमांचक मुकाबला? इस स्टेडियम में भिड़ेंगी दोनों टीमें, यहां जानें वेन्यू समेत मैच से जुड़ी सभी जानकारी

RCB vs KKR, IPL 2026 57th Match Scorecard: रायपुर में कोलकाता नाइट राइडर्स ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के सामने रखा 193 रनों का टारगेट, अंगकृष रघुवंशी ने खेली धमाकेदार पारी; यहां देखें पहली पारी का स्कोरकार्ड

ENG vs NZ Test Series 2026: न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टेस्ट के लिए इंग्लैंड टीम का ऐलान, बेन स्टोक्स होंगे कप्तान; एमिलियो गे, सॉनी बेकर और जेम्स रियू को पहली बार मौका