देश की खबरें | गवाहों को समन तामील न कराने को लेकर अदालत ने पुलिस अधिकारियों की खिंचाई की

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नयी दिल्ली, 19 दिसंबर दिल्ली की एक अदालत ने एक मामले में गवाहों को समन तामील न कराने पर पुलिस अधिकारियों की खिंचाई की और पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) को मामले में "आवश्यक कार्रवाई" करने का निर्देश भी दिया।

वर्ष 2020 के उत्तर पूर्व दिल्ली दंगों से संबंधित एक मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि हालांकि वी-बी (सतर्कता ब्यूरो) शाखा के माध्यम से गवाहों को तामील कराये जाने के लिए समन भेजा गया था, लेकिन उसे इसके बारे में कोई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई।

हर पुलिस थाने में मौजूद वी-बी शाखा को समन, अदालत के नोटिस और वारंट तामील कराने की जिम्मेदारी होती है।

अभियोजन पक्ष ने अदालत को सूचित किया कि हाल ही में हुए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) चुनाव के कारण वी-बी अधिकारियों ने गवाहों के लिए समन नहीं लिया।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला ने पिछले सप्ताह पारित एक आदेश में कहा, ‘‘मैं वी-बी शाखा से संबंधित अधिकारियों के इस तरह के आचरण और दृष्टिकोण की सराहना नहीं कर सकता। गवाहों को तामील कराने के लिए अदालत द्वारा जारी समन को नहीं भेजना कदाचार है और इस तरह के संबंधित अधिकारी द्वारा किसी भी तरह की रिपोर्ट अदालत को न भेजने का स्वत: निर्णय इस कदाचार को बढ़ाता है।’’

न्यायाधीश ने कहा कि चूंकि समन तामील कराने के लिए पर्याप्त समय था, अधिकारियों के इस तरह के आचरण की जांच करने और उचित कदम उठाने के लिए मामला डीसीपी (अपराध) को भेजा जाता है।

अदालत ने निर्देश दिया कि आदेश की कॉपी संबंधित डीसीपी को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी जाए।

आरोपी लखपत रजोरा व अन्य के खिलाफ दंगे का मामला करावल नगर थाने में दर्ज किया गया था।

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